सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली पुलिस की बड़ी राहत, अब इन इलाकों में हो सकेंगे शांतिपूर्ण प्रदर्शन

राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद दिल्ली पुलिस ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब उन इलाकों में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की अनुमति दी जाएगी, जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू नहीं है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद उठाया गया है, जिसमें प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और शहर की व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की बात कही गई थी।
दरअसल, 11 अक्टूबर 2026 को रविवार के दिन हुई एक विशेष सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। अदालत ने आदेश दिया कि दिल्ली मेट्रो और रेलवे सेवाओं का संचालन बिना किसी बाधा के होना चाहिए और इंटरनेट सेवाओं को चालू रखा जाए। साथ ही, कोर्ट ने सुरक्षा बैरिकेड्स की तैनाती की समीक्षा करने और सुप्रीम कोर्ट के आसपास के इलाकों से धारा 163 को हटाने के निर्देश दिए, ताकि वहां पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक न रहे। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शनकारियों को अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों की रिहाई और पुलिस की कार्रवाई
यह पूरा विवाद तब गहराया जब 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने करीब 500 लोगों को हिरासत में ले लिया था। इनमें पार्टी नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका भी शामिल थे। 24 घंटे की हिरासत के बाद रिहा हुए नेताओं ने सरकार की कार्यप्रणाली की तीखी आलोचना की और माहौल को तनावपूर्ण बताया।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब जंतर मंतर के 10 किलोमीटर के दायरे में पुलिस चेकिंग कम कर दी गई है, जिससे शहर में ट्रैफिक की समस्या में भी काफी राहत मिली है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिन क्षेत्रों में अभी भी धारा 163 लागू है, वहां कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानूनी ढांचे और कोर्ट के निर्देशों के तहत कार्रवाई जारी रहेगी। इस पूरे मामले में गृह मंत्रालय के सचिव गोविंद मोहन, पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और DMRC चेयरपर्सन डी थारा जैसे अधिकारियों को 13 अक्टूबर तक अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है।