दिल्ली पुलिस में बड़ा फेरबदल: 25 से ज्यादा अधिकारियों के तबादले, सुरक्षा कड़ी
दिल्ली पुलिस में 25 से ज्यादा IPS और DANIPS अधिकारियों का तबादला किया गया है। यह फेरबदल CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शनों के बीच हुआ है।

राजधानी में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक मजबूती के लिए दिल्ली पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली गृह विभाग ने पुलिस विभाग के भीतर एक व्यापक संगठनात्मक फेरबदल करते हुए 25 से अधिक IPS और DANIPS अधिकारियों का तबादला कर दिया है। यह आदेश पुलिस स्थापना बोर्ड की सिफारिशों और उपराज्यपाल (LG) की मंजूरी के बाद 23 अक्टूबर 2026 को जारी किए गए हैं।
इस फेरबदल का असर क्राइम ब्रांच, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF), सिक्योरिटी, स्पेशल सेल और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) जैसे महत्वपूर्ण विभागों पर पड़ा है। अधिकारियों की नई तैनाती में मोनिका भारद्वाज को एडिशनल सीपी क्राइम से हटाकर एडिशनल सीपी ANTF बनाया गया है। वहीं, राहुल मलिक और गौरव शर्मा को एडिशनल सीपी सिक्योरिटी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा, राजा बंथिया को डीसीपी टेक्नोलॉजी एंड प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन बनाया गया है, जबकि प्रवीण कुमार त्रिपाठी अब पुलिस कमिश्नर सचिवालय के डीसीपी होंगे। नेहा यादव को डीसीपी PMMC के पद पर तैनात किया गया है।
विरोध प्रदर्शनों के बीच सुरक्षा के कड़े इंतजाम
यह प्रशासनिक बदलाव ऐसे समय में आया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की तैयारी है। 'पीपल्स अगेंस्ट SIR' गठबंधन, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और विभिन्न ट्रेड यूनियनों सहित नागरिक समाज के सदस्य इस प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। ब्रिंदा करात, प्रशांत भूषण, राकेश टिकैत और तुषार गांधी जैसे प्रमुख चेहरे इस मुहिम का हिस्सा हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि CEC ज्ञानेश कुमार को हटाया जाए और मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) को वापस लिया जाए।
आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग ने अपनी तटस्थता खो दी है और कई पात्र मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, हालांकि आयोग ने इन दावों को खारिज किया है। सुरक्षा की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 273 कंपनियों को तैनात किया गया है, जिनकी तैनाती 31 अक्टूबर तक रहेगी।
वहीं, राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर अलग-अलग राय है। जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने मुख्य चुनाव आयुक्त का बचाव करते हुए कहा कि विपक्षी दल संसदीय प्रक्रियाओं का पालन नहीं कर रहे हैं। दूसरी ओर, 'पीपल्स मार्च टू रिक्लेम डेमोक्रेसी' ने साफ कर दिया है कि वे अपने मार्च के लिए पुलिस की अनुमति नहीं लेंगे।