NSUI नेता की याचिका पर दिल्ली पुलिस ने उठाए सवाल, हाईकोर्ट में दी चुनौती

दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के एक पदाधिकारी द्वारा दायर याचिका की वैधता पर सवाल उठाए हैं। यह याचिका 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों और आम जनता के साथ कथित तौर पर हुई मारपीट की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर दाखिल की गई थी। NSUI याचिका दिल्ली पुलिस के लिए अब कानूनी बहस का विषय बन गई है।
अदालत में दिल्ली पुलिस का पक्ष रखते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की खंडपीठ को बताया कि याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट के जनहित याचिका (PIL) नियम, 2010 का पालन नहीं किया है। ASG ने विशेष रूप से नियम 9(f) और 9(g) का हवाला देते हुए कहा कि जब कोई याचिकाकर्ता किसी संगठन से जुड़ा होता है, तो उसे उस संगठन के कार्यों और अपनी संबद्धता का खुलासा करना अनिवार्य होता है।
संगठनात्मक पहचान छिपाने का आरोप
अदालत में दलील दी गई कि याचिकाकर्ता NSUI का पदाधिकारी है, जो कांग्रेस की छात्र इकाई है, लेकिन याचिका में इस बात का जिक्र नहीं किया गया। हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने यह तर्क दिया कि यह याचिका व्यक्तिगत क्षमता में दायर की गई है और इसमें केवल उन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है जिन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हमला किया था।
इसके जवाब में ASG ने स्पष्ट किया कि केवल यह कह देना कि याचिका व्यक्तिगत क्षमता में है, किसी व्यक्ति को उसकी संगठनात्मक पहचान बताने की कानूनी बाध्यता से नहीं बचा सकता। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की इस आपत्ति को दर्ज कर लिया है और ASG को तीन सप्ताह के भीतर इस याचिका की स्वीकार्यता पर प्रारंभिक आपत्तियां दर्ज कराते हुए एक हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी।