दिल्ली पुलिस: मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ जंतर-मंतर पर 2 अक्टूबर के प्रदर्शन की अभी तक अनुमति नहीं

Kittu Kumari29 September 20262 min read7 viewsNational
दिल्ली पुलिस: मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ जंतर-मंतर पर 2 अक्टूबर के प्रदर्शन की अभी तक अनुमति नहीं

दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के लिए अभी तक कोई अनुमति नहीं दी गई है। यह प्रस्तावित प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) विवाद और सीईसी के इस्तीफे की मांग को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे अभियान का हिस्सा है। आप के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सोमवार को लोगों से जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी, जबकि अन्य विपक्षी समूह भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 2 अक्टूबर को शाम 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में एक समानांतर 'जेल भरो आंदोलन' की घोषणा की है। दिपके ने पहले कहा था कि मुंबई पुलिस ने सीईसी कुमार के खिलाफ उनके CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। मुंबई पुलिस ने स्पष्ट किया कि 2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के मद्देनजर वह शिवाजी पार्क में सभा की अनुमति देने के लिए अधिकृत नहीं है क्योंकि यह क्षेत्र एक 'साइलेंट जोन' है और आवेदक को वैकल्पिक स्थान तलाशने की सलाह दी गई थी।

शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने भी एक्स पर पोस्ट कर सीईसी के खिलाफ प्रदर्शनों का समर्थन किया है। कांग्रेस ने सोमवार को राज्य राजधानियों और जिलों में प्रदर्शन करके मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ अपने विरोध को तेज कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है और कहा है कि पार्टी एसआईआर मुद्दे पर गंभीरता से लड़ेगी। सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा है कि एसआईआर अभ्यास और चुनाव आयोग के कामकाज पर चर्चा के लिए 30 सितंबर को 'इंडिया' गठबंधन की बैठक होने की उम्मीद है।

यह राजनीतिक विवाद द इंडियन एक्सप्रेस की एक खोजी रिपोर्ट के बाद और तेज हो गया है, जिसमें कहा गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर अभ्यास से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। इस बीच, चुनाव आयोग ने इस सुझाव को खारिज कर दिया है कि दर्ज की गई आपत्तियां संस्थागत असहमति को दर्शाती हैं, और यह बनाए रखा है कि एसआईआर से संबंधित निर्णय आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे।

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