दिल्ली पुलिस ने 23 अगस्त 2026 को GenZ प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह कदम हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा चलाए गए 'कॉकरोच प्रोटेस्ट' के बाद उठाया गया है, जो मुख्य न्यायाधीश की बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच बताने वाली टिप्पणी पर शुरू हुआ था। पुलिस बल को पिछले प्रदर्शनों के दौरान आलोचना का सामना करना पड़ा था, और इसका उद्देश्य सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले मीम्स के प्रभाव को कम करना है।
निर्देश में कर्मियों को चेतावनी दी गई है कि उनके 'गुस्से वाले चेहरों' का उपयोग कंटेंट के रूप में किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों को तटस्थ रहने, भावनात्मक अपीलों का जवाब न देने और रोने, गिड़गिड़ाने या आक्रामक सवाल जैसे उकसावे में न आने का निर्देश दिया गया है।
अधिकारियों को व्यक्तिगत सामान या रिकॉर्डिंग डिवाइस छीनने, वस्तुएं फेंकने या बहस करने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है। दिशा-निर्देशों में यह अनिवार्य किया गया है कि कर्मी हर समय पेशेवर बॉडी लैंग्वेज और सम्मानजनक भाषा बनाए रखें। ये निर्देश दिल्ली के सभी 15 पुलिस जिलों के साथ-साथ रेलवे और मेट्रो यूनिटों में भी वितरित किए गए हैं।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट CJP प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की ज्यादतियों और हिंसा के आरोपों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने की तैयारी कर रहा है, जिसमें 20 जुलाई 2026 को pellet guns के विवादास्पद इस्तेमाल की जांच भी शामिल है। हाल ही में हुई कार्रवाई में, दिल्ली पुलिस ने 23 अगस्त 2026 को शाह ऑडिटोरियम में UGC Equity Regulation 2026 और जातिगत आरक्षण के खिलाफ होने वाले प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
यह फैसला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लिया गया, जो नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट में पांच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर प्रतिबंध लगाती है। इसके अलावा, 22 अगस्त 2026 को पुलिस ने जंतर मंतर पर जातिगत कोटे का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों को बिना अनुमति के होने का हवाला देते हुए तितर-बितर कर दिया। साथ ही, दिल्ली सरकार ने घोषणा की कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में गिरफ्तारियों की समीक्षा करेगी, जिसमें गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े लोग शामिल नहीं होंगे।