दिल्ली पुलिस ने साइबर फ्रॉड और वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने के लिए डी4सी सेंटर लॉन्च किया

दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने और ठगी गई रकम की रिकवरी को तेजी से पूरा करने के लिए आधिकारिक तौर पर दिल्ली साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (D4C) की स्थापना की है। यह नया केंद्र राष्ट्रीय राजधानी में सभी साइबर मामलों की जांच के लिए नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगा। इस पहल के बारे में अधिक जानकारी ANI News पर देखी जा सकती है। यह केंद्र गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के अनुरूप बनाया गया है।
कमांड सेंटर और विशेष विंग
जय सिंह रोड स्थित पुलिस मुख्यालय के टॉवर-2 की पहली मंजिल पर स्थित, D4C एक 24/7 कमांड सेंटर के रूप में काम करता है। यह केंद्र 1930 राष्ट्रीय हेल्पलाइन, फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर और द्वारका में स्थित इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट को आपस में जोड़ता है। इस सुविधा को चार विशेष विंग में बांटा गया है, जिनका नेतृत्व डिप्टी कमिश्नर स्तर के अधिकारी करते हैं। ये विंग प्रशासन, साइबर जांच, डिजिटल फोरेंसिक, हेल्पलाइन संचालन और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ संवेदनशील मामलों को संभालती हैं।
तकनीकी और जांच प्रणालियां
D4C फ्रॉड नेटवर्क को ट्रैक करने के लिए एआई-आधारित टूल का उपयोग करता है। इसका उद्देश्य अवैध बैंक ट्रांजैक्शन को मिनटों में फ्रीज करना है ताकि पैसों को कई खातों में ट्रांसफर होने से रोका जा सके। इसके अलावा, केंद्र में एक 'हॉक्स बॉम्ब ई-मेल इन्वेस्टिगेशन सेल' भी है जो अनाम धमकियों और वीपीएन-मास्क संचार की जांच करती है। इसमें I4C द्वारा अगस्त 2026 में शुरू किया गया 'मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल' (MRM) भी शामिल है, जिससे पीड़ित बैंक शाखाओं के चक्कर काटे बिना अपने पैसे वापस पाने का अनुरोध कर सकते हैं।