स्वरुप नगर रेप-मर्डर केस में तीन नाबालिगों पर वयस्क की तरह चले मुकदमा, दिल्ली पुलिस ने की मांग

Kittu Kumari19 September 20262 min read13 viewsDelhi Local
स्वरुप नगर रेप-मर्डर केस में तीन नाबालिगों पर वयस्क की तरह चले मुकदमा, दिल्ली पुलिस ने की मांग

दिल्ली पुलिस स्वरुप नगर में 16 साल की लड़की के साथ हुए गैंगरेप और हत्या के मामले में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। पुलिस तीन नाबालिग आरोपियों पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाने के लिए कोर्ट में आवेदन देने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा, पुलिस अगले एक हफ्ते में इस मामले में एक व्यापक चार्जशीट भी दाखिल करने वाली है। इस जघन्य मामले में 19 वर्षीय मुख्य आरोपी शिवम उर्फ सुदामा उर्फ चुचु को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं, 16 और 17 साल के तीन नाबालिगों को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया गया था, जहां से उन्हें बाल सुधार गृह भेज दिया गया है।

घटना के खुलासे के बारे में पुलिस ने बताया कि 11 सितंबर की तड़के 16 साल की पीड़िता के साथ कथित तौर पर गैंगरेप किया गया और उसे छह से आठ बार चाकू मारा गया। पीड़िता का शव 13 सितंबर को कुशक रोड के पास एक खुले मैदान से बरामद हुआ था। शव बहुत ज्यादा सड़-गल चुका था और जंगली जानवरों द्वारा उसे नुकसान पहुंचाया गया था। पुलिस ने शरीर पर बने एक टैटू के जरिए पीड़िता की पहचान की थी। इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने तकनीकी जांच का सहारा लिया और 50 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जिससे अपराध में इस्तेमाल किए गए एक मालवाहक वाहन का पता चला। पुलिस ने आरोपियों से जुड़े दो चाकू और कपड़े भी बरामद कर लिए हैं।

जांच में सामने आया है कि पीड़िता और चारों आरोपियों समेत पांचों लोग आपस में पड़ोसी और दोस्त थे जो एक साथ बैठकर शराब पी रहे थे। एक गिरफ्तार आरोपी ने दावा किया कि जब उसने पीड़िता से शादी करने से मना किया, तो उसने रेप का केस दर्ज कराने की धमकी दी, जिसके बाद आरोपी गुस्से में आ गए और हिंसा पर उतर आए। आउटर नॉर्थ के डीसीपी शोभित डी. सक्सेना के मुताबिक, पुलिस नाबालिगों पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाने के लिए गंभीर अपराध वाले प्रावधानों का इस्तेमाल कर रही है। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) हत्या के लिए, 238(A) सबूत मिटाने के लिए, 65(1) 16 साल से कम उम्र की लड़की से रेप के लिए, 3(5) साझा मंशा के तहत और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की धारा 6 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। अधिकारी नाबालिगों की उम्र की पुष्टि के लिए बोन ओसीफिकेशन टेस्ट (हड्डियों की जांच) और स्कूल के रिकॉर्ड का इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं।

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