दिल्ली पुलिस ने 'जन सुनवाई' कार्यक्रम के जरिए लोगों की शिकायतें दूर करने की बात दोहराई

दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक तौर पर 'जन सुनवाई' पहल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया है, और नागरिकों को प्रोत्साहित किया है कि वे अपनी समस्याओं और सुझावों को सीधे पुलिस के सामने रखें ताकि उनका तुरंत समाधान हो सके। 12 सितंबर 2026 तक, विभाग ने इस कार्यक्रम को जनता का भरोसा बनाए रखने और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग सुनिश्चित करने का एक अहम जरिया बताया है (दिल्ली पुलिस प्रेस विज्ञप्ति)। यह कार्यक्रम दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देशों के बाद शुरू किया गया था। यह राष्ट्रीय राजधानी के सभी पुलिस स्टेशनों में हर शनिवार को सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक साप्ताहिक सत्र के रूप में आयोजित किया जाता है।
पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत, विशेष आयुक्त, संयुक्त आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त, पुलिस उपायुक्त (DCP) और सहायक आयुक्त (ACP) जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को रोटेशन के आधार पर इन जनसुनवाई में शामिल होना अनिवार्य किया गया है। इन सत्रों के दौरान, सभी पुलिस स्टेशनों को उन शिकायतों को भी दर्ज करना अनिवार्य किया गया है जो पहले इंटीग्रेटेड कम्प्लेंट मॉनिटरिंग सिस्टम (ICMS) में दर्ज नहीं की गई थीं। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करना है कि उन्हें ट्रैकिंग के लिए अपलोड किया जाए।
पुलिस कर्मियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे जनता के अनुकूल माहौल बनाए रखें, बैठने की सही व्यवस्था करें, सहायता डेस्क बनाएं और सभी शिकायतों को तुरंत संभालें। जिन मामलों में फील्ड वेरिफिकेशन की जरूरत होती है, उन्हें तुरंत सौंपा जाता है। जवाबदेही सुनिश्चित करने और सेवा में किसी भी तरह की लापरवाही को रोकने के लिए सभी जिलों को हर पखवाड़े प्रगति रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया है।
शाहदरा और दक्षिण-पूर्व जिला जैसे पिछले सत्रों में यह साबित हो चुका है कि यह कार्यक्रम मौके पर ही बड़ी संख्या में शिकायतों को सुलझाने की क्षमता रखता है (PTI News)।