नरीना थाने में दिल्ली पुलिस की 'जन सुनवाई', आम जनता की समस्याओं का मौके पर हुआ निपटारा

दिल्ली पुलिस ने आम जनता और कानून व्यवस्था के बीच की दूरी को कम करने के लिए एक खास पहल की है। इसी कड़ी में पश्चिम दिल्ली डीसीपी कार्यालय के माध्यम से 17 अक्टूबर 2026 को नरीना पुलिस स्टेशन में दिल्ली पुलिस जन सुनवाई का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों को सीधे सुनना, उनके सुझाव लेना और पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता लाकर लोगों का भरोसा जीतना था। इस पूरी मुहिम को और प्रभावी बनाने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल्स के जरिए लोगों को इसकी जानकारी दी।
क्या है 'थाना दिवस-जन सुनवाई' प्रोग्राम?
यह आयोजन किसी एक थाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 'थाना दिवस-जन सुनवाई' नामक एक बड़े प्रोग्राम का हिस्सा है। इस मुहिम की शुरुआत जून 2026 में दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन में की गई थी। इस प्रोग्राम के तहत दिल्ली के सभी पुलिस थानों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे हर शनिवार सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक जन सुनवाई सत्र आयोजित करें, ताकि आम आदमी को अपनी बात रखने के लिए भटकना न पड़े।
इस पहल की नींव पूर्व कमिश्नर सतीश गोलचा के समय रखी गई थी और वर्तमान में दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार इसकी निगरानी कर रहे हैं। इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें जवाबदेही तय की गई है। थाना प्रभारी (SHO) से लेकर स्पेशल कमिश्नर तक के अधिकारियों को रोटेशन के आधार पर इन सत्रों में शामिल होना पड़ता है।
नियमों के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों को हर उस शिकायत को दर्ज करना होता है जो जनता द्वारा लाई जाती है, चाहे वह शिकायत पहले से 'इंटीग्रेटेड कंप्लेंट मॉनिटरिंग सिस्टम' (ICMS) पर दर्ज हो या नहीं। जिन मामलों में जांच की जरूरत होती है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तेजी से निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, थानों में आम लोगों के लिए एक मित्रवत माहौल बनाने पर जोर दिया गया है। जिला कार्यालयों को हर 15 दिन में एक रिपोर्ट जमा करनी होती है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाता है कि कितनी शिकायतें मिलीं, कितनी हल हुईं और कितनी अभी लंबित हैं।