दिल्ली पुलिस ने इंटरनेट गतिविधि मेटाडेटा की निगरानी के लिए बनाए नए नियम, तुरंत लागू

दिल्ली पुलिस ने इंटरनेट यूजर्स की ऑनलाइन गतिविधियों के मेटाडेटा तक पुलिस अधिकारियों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) तैयार की है। यह नई SOPs इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड (IPDR) और डंप-डेटा एनालिसिस के लिए बनाई गई हैं, जिन्हें शनिवार, 8 अगस्त 2026 को सभी इन्वेस्टिगेटर्स को आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, 10 अगस्त 2026 तक इन SOPs को लागू करने की पुष्टि कर दी गई थी।
कॉल डिटेल और IPDR का होगा इस्तेमाल
नई गाइडलाइंस के तहत अधिकारियों को IPDR को कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), नो योर कस्टमर (KYC) विवरण और मोबाइल टॉवर डेटा के साथ मिलाने की अनुमति मिलती है, जिससे किसी व्यक्ति की ऑनलाइन गतिविधियों की पूरी जानकारी मिल सके। एक्सेस किए जाने वाले मेटाडेटा में डेटा एक्सचेंज के रिकॉर्ड, सर्विस या एप्लीकेशन एक्सेस के टाइमस्टैम्प, सोर्स और डेस्टिनेशन IP एड्रेस, पोर्ट नंबर, अपलोड और डाउनलोड किए गए बाइट्स, सेशन की अवधि और सब्सक्राइबर आइडेंटिफायर्स शामिल हैं।
संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों की होगी पहचान
इन SOPs में VPN और प्रॉक्सी सर्विस के इस्तेमाल, असामान्य या हाई-रिस्क IP एड्रेस से आने वाले कनेक्शन, नॉन-स्टैंडर्ड पोर्ट्स के इस्तेमाल जैसी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों की पहचान करने के लिए मार्गदर्शन दिया गया है। इसके अलावा असामान्य पोर्ट्स पर एन्क्रिप्टेड ट्रैफिक, लंबे समय तक चलने वाले लो-डेटा सेशन, एक ही रिमोट IP से बार-बार कनेक्शन और ऑफ-पीक घंटों के दौरान असामान्य रूप से अधिक डेटा वॉल्यूम की निगरानी भी इसमें शामिल है। इस संबंध में जानकारी Hindustan Times और The Wire Staff द्वारा रिपोर्ट की गई थी।
किन मामलों में होगी मदद
एक सीनियर पुलिस अधिकारी के अनुसार, लाल किले पर विस्फोट की घटना, गंभीर आपराधिक मामलों या बड़े पैमाने पर आयोजित सार्वजनिक आयोजनों जैसे गंभीर मामलों के दौरान IPDR एनालिसिस की बढ़ती जरूरत को देखते हुए ये गाइडलाइंस तैयार की गई हैं। इन SOPs का विकास दिल्ली पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर द्वारा तैयार किए गए दस्तावेज पर आधारित है, जिसकी जानकारी विभिन्न मीडिया घरानों द्वारा दी गई है।