दिल्ली पुलिस ने CJP प्रदर्शन के 2500 आरोपियों की पहचान की, सोशल मीडिया पर जांच बढ़ाई

दिल्ली पुलिस ने पिछले महीने Cockroach Janata Party (CJP) के 'चलो संसद' मार्च के दौरान 6 दिनों तक हुई हिंसा और पथराव में शामिल लगभग 2,500 लोगों की पहचान कर ली है। सरकार को सौंपी गई दिल्ली पुलिस की एक आंतरिक रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि इन लोगों की पहचान करने के लिए फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी और AI-enabled कैमरों का इस्तेमाल किया गया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2,873 प्रदर्शनकारियों का क्रिमिनल बैकग्राउंड था, जिनमें से 989 गंभीर अपराधों में शामिल थे। इनमें हत्या के 101 मामले, हत्या के प्रयास के 62 मामले और डकैती व लूटपाट की 284 घटनाएं शामिल थीं।
हिंसा और नुकसान की पूरी जानकारी
CJP के 'चलो संसद' मार्च को दिल्ली पुलिस ने अनुमति नहीं दी थी, जो 20 जुलाई 2026 को हिंसा में बदल गया और 25 जुलाई 2026 तक जारी रहा। ये विरोध प्रदर्शन NEET पेपर लीक के खिलाफ थे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे। 25 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित कुछ सरकारी मांगें पूरी होने के बाद पथराव बंद हुआ था। इस अशांति के कारण सैकड़ों वाहनों के साथ-साथ सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। इन झीपड़ों और झड़पों के दौरान 5-6 IPS अधिकारियों सहित 118 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि लगभग 60-65 प्रदर्शनकारी भी घायल हुए। इस हिंसा के संबंध में कुल पंद्रह First Information Reports (FIRs) दर्ज की गईं।
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जांच का दायरा
2 अगस्त 2026 को सामने आए एक ताजा घटनाक्रम में, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनों और इससे जुड़े वायरल वीडियो की जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अब इसमें सोशल मीडिया नेटवर्क, डिजिटल मार्केटिंग कंपनियां और 100 से अधिक YouTubers को शामिल किया गया है। अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या विवादित सामग्री का प्रचार स्वतःस्फूर्त था या यह किसी संगठित डिजिटल अभियान का हिस्सा था, साथ ही संभावित फंडिंग के स्रोतों की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां संबंधित संस्थाओं के दस्तावेजों, सर्वर लॉग और डिजिटल रिकॉर्ड की समीक्षा कर रही हैं, और पूछताछ के लिए वरिष्ठ अधिकारियों और कंटेंट क्रिएटर्स को नोटिस भेजे जा सकते हैं।