जंतर-मंतर प्रदर्शन: फूड रैपर्स से सप्लायर्स की पहचान का मामला, दिल्ली पुलिस ने दी सफाई

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान एक बड़ी खबर सामने आई है। आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खाना सप्लाई करने वाले रेस्टोरेंट्स और कैफे की पहचान करने के लिए वहां फेंके गए फूड रैपर्स और पैकेजिंग का इस्तेमाल किया। इस मामले की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
• पुलिस पर फूड सप्लायर्स की पहचान के लिए रैपर्स जांचने का आरोप।
• रेस्टोरेंट मालिकों का दावा- उन्हें बड़े ऑर्डर न लेने की सलाह दी गई।
• दिल्ली पुलिस ने फूड डिलीवरी पर प्रतिबंध के दावों को सिरे से नकारा।
• प्रदर्शनकारियों का आरोप- पुलिस ने खाना रोकने के लिए चेकपोस्ट बनाए।
फूड रैपर्स से सप्लायर्स तक पहुंची पुलिस
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने जंतर-मंतर के आसपास के कई भोजनालयों का दौरा किया और वहां के ऑर्डर रिकॉर्ड तथा डिलीवरी लॉग्स की जांच की। रेस्टोरेंट मालिकों ने दावा किया कि उन्हें प्रदर्शन स्थल पर बड़े पैमाने पर खाना सप्लाई बंद करने के लिए कहा गया था। बताया जा रहा है कि पुलिस ने इन ऑर्डर्स को संदेह के घेरे में रखा था, जिसके बाद से इलाके में खाने की सप्लाई को लेकर काफी चर्चा रही।
पुलिस ने आरोपों को बताया 'गलत और भ्रामक'
इस पूरे मामले पर दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि नई दिल्ली इलाके में फूड डिलीवरी पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर चल रही इन दावों को 'झूठा, आधारहीन और गुमराह करने वाला' करार दिया है। हालांकि, 24 जुलाई को जारी एक ट्रैफिक एडवाइजरी में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 का हवाला देते हुए स्विगी (Swiggy) और जोमैटो (Zomato) जैसे प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित क्षेत्र में ऑपरेशंस सीमित करने की सलाह दी गई थी। पुलिस ने खाना ले जाने वाले लोगों को हिरासत में लेने के आरोपों को भी खारिज किया और इसे रूटीन सिक्योरिटी चेक बताया।
कॉकローチ जनता पार्टी का विरोध
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख गुट 'कॉकローチ जनता पार्टी' (CJP) ने पुलिस पर खाने की सप्लाई रोकने और नागरिकों को अवैध रूप से हिरासत में लेने का आरोप लगाया। CJP के प्रवक्ताओं ने दावा किया कि पुलिस ने चेकपोस्ट लगाकर रेस्टोरेंट मालिकों को डराया-धमकाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जंतर-मंतर लोकतांत्रिक असहमति जताने की जगह है। यह पूरा आंदोलन नीट पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर था। 25 जुलाई को मंत्री के इस्तीफे के बाद 26 जुलाई तक प्रदर्शन स्थल को हटा दिया गया था।