SFI और CJP के प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस का एक्शन, दर्ज कीं 20 से ज्यादा FIR

राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए भारी विरोध प्रदर्शन के बाद अब दिल्ली पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम के सिलसिले में 20 से अधिक प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की हैं। यह प्रदर्शन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया गया था।
घटनाक्रम की शुरुआत 10 अक्टूबर 2026 को हुई, जब जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए SFI के 400 से अधिक सदस्यों और सुप्रीम कोर्ट से मार्च कर रहे कई वकीलों को हिरासत में ले लिया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी थी और कई दिग्गज चेहरे भी पुलिस की गिरफ्त में आए। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, पिनाराई विजयन और माणिक सरकार के साथ-साथ मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी भी शामिल थे।
हिरासत, जमानत और पुलिस की कार्रवाई
इस प्रदर्शन के दौरान CJP के नेताओं अभिजीत डिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 170 के तहत हिरासत में लिया गया था। हालांकि, 11 अक्टूबर को दिल्ली कैंट स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेशी के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई की शर्त के तौर पर उन्हें एक साल तक शांति और अच्छे व्यवहार बनाए रखने के लिए 50,000 रुपये का मुचलका भरना पड़ा।
पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने, सरकारी काम में बाधा डालने और प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वहीं, इस मामले में एक अलग मोड़ तब आया जब पुलिस ने एक वायरल वीडियो के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए हिंदू रक्षा दल से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया। इन लोगों पर प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट और महिलाओं के साथ बदसलूकी करने का आरोप है।
दूसरी ओर, CJP के नेतृत्व ने सरकार के इस रवैये की निंदा की है। उनका कहना है कि सरकार बल प्रयोग के जरिए लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचल रही है, लेकिन वे जवाबदेही तय करने की अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।