विरोध प्रदर्शन और ऑनलाइन दुष्प्रचार: दिल्ली पुलिस ने दर्ज की 8 FIR

राजधानी में हाल ही में हुए राजनीतिक प्रदर्शनों और सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे झूठ के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। पुलिस ने अलग-अलग मामलों में कुल 8 एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं। इनमें से कुछ मामले विपक्षी गठबंधन के विरोध मार्च से जुड़े हैं, तो कुछ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे दुष्प्रचार अभियान से संबंधित हैं।
बता दें कि 12 अक्टूबर 2026 को 'INDIA' गठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग के विशेष गहन संशोधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकाला था। इस मार्च में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी और तेजस्वी यादव जैसे बड़े नेता शामिल थे। पुलिस के मुताबिक, यह प्रदर्शन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा के बावजूद किया गया था। इस दौरान सड़क पर तोड़फोड़ और बैरिकेड्स को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 4 एफआईआर दर्ज की गई हैं।
सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों और AI वीडियो पर एक्शन
प्रदर्शनों के अलावा, दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने ऑनलाइन दुष्प्रचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने 4 और एफआईआर दर्ज की हैं, जिनमें भारत विरोधी नैरेटिव फैलाने वाले सोशल मीडिया हैंडल्स की जांच की जा रही है। जांच में सामने आया है कि 100 से ज्यादा संदिग्ध अकाउंट्स पाकिस्तान से संचालित हो रहे हैं।
पुलिस ने अब तक 500 से अधिक आपत्तिजनक पोस्ट हटवाए हैं और कई पाकिस्तानी अकाउंट्स को बंद कराने की प्रक्रिया जारी है। घरेलू स्तर पर भी कार्रवाई की जा रही है, जिसमें पुलिस फायरिंग के झूठे दावे करने वाले एक हैंडल (@indiantiwari01) को चेतावनी दी गई है। इसके अलावा, पुलिस अब AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा बनाए गए फर्जी वीडियो पर भी नजर रख रही है। पिछले हफ्ते ही पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था, जिसने पुलिस के दुर्व्यवहार का फर्जी AI वीडियो वायरल किया था।
एक अन्य मामले में, 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेताओं—सौरव दास, आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे को जंतर मंतर पर निषेधाज्ञा के उल्लंघन और अनधिकृत प्रवेश के आरोप में हिरासत में लिया गया, जिसके बाद उनके खिलाफ भी अलग से मामला दर्ज किया गया है।