जामिया मिलिया इस्लामिया में घुसपैठ: प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने पहुंचे सांसदों पर FIR दर्ज
जामिया मिलिया इस्लामिया में प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने पहुंचे सांसदों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने यूनिवर्सिटी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है।

दिल्ली पुलिस ने जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश करने के आरोप में कुछ सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई यूनिवर्सिटी प्रशासन की शिकायत के बाद की गई है। दरअसल, ये सांसद कैंपस में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मिलने पहुंचे थे, जिसे प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन और घुसपैठ माना है।
जामिया कैंपस में यह तनाव पिछले कई दिनों से बना हुआ है। छात्र अपनी मांगों को लेकर 12 अक्टूबर से भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांगों में जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) की बहाली, प्रदर्शनकारी छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लेना और यूनिवर्सिटी के चीफ प्रॉक्टर को पद से हटाना शामिल है।
कैंपस में तनाव और प्रशासन का कड़ा रुख
विरोध प्रदर्शन के शुरुआती दिनों में जब दिल्ली पुलिस ने छात्रों को निर्धारित विरोध स्थल से हटाने की कोशिश की, तो स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। इस बीच, यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ और रजिस्ट्रार प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिज़वी सहित करीब 1,500 टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ ने शनिवार को अंसारी ऑडिटोरियम के लॉन में एक बैठक की।
इस बैठक में यूनिवर्सिटी स्टाफ ने कैंपस की दीवारों पर लिखे आपत्तिजनक नारों और तोड़फोड़ की घटनाओं पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि ऐसी हरकतें 106 साल पुराने इस प्रतिष्ठित संस्थान की गरिमा और शैक्षणिक माहौल को नुकसान पहुंचाती हैं। बैठक के बाद दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए:
- पहला, कर्मचारियों ने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे गालिब स्टैच्यू लॉन को खाली कर दें और अपना आंदोलन समाप्त करें, क्योंकि गेट नंबर 18 को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया गया था।
- दूसरा, फैकल्टी और स्टाफ ने निर्णय लिया कि वे उन दीवारों को फिर से पेंट करेंगे जिन्हें खराब किया गया है और उन नारों को मिटाएंगे जो देश की अखंडता और सुरक्षा के खिलाफ हैं।
गौरतलब है कि जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन को साल 2006 में निलंबित कर दिया गया था। उस समय शिक्षकों पर हमलों और कक्षाओं में बार-बार होने वाले व्यवधानों के कारण यह कड़ा फैसला लिया गया था। फिलहाल, यूनिवर्सिटी प्रशासन और छात्रों के बीच मध्यस्थता के प्रयास जारी हैं।