जामिया मिलिया इस्लामिया में घुसपैठ का आरोप, 3 सांसदों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR
जामिया मिलिया इस्लामिया प्रशासन की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने तीन सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जानें क्या है पूरा मामला।

देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जामिया मिलिया इस्लामिया में तनाव बढ़ता जा रहा है। यूनिवर्सिटी प्रशासन की एक औपचारिक शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने तीन सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इन सांसदों पर कैंपस में अवैध रूप से घुसपैठ करने और माहौल बिगाड़ने का गंभीर आरोप लगाया गया है। यह पूरी कार्रवाई 25 अक्टूबर 2026 को दर्ज की गई एफआईआर के बाद शुरू हुई है।
यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार महताब आलम रिज़वी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में कांग्रेस सांसदों इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद का नाम प्रमुखता से शामिल है। प्रशासन का दावा है कि इमरान मसूद दीवार फांदकर परिसर के अंदर घुसे, जबकि इमरान प्रतापगढ़ी पर ताला तोड़कर अंदर प्रवेश करने का आरोप है। इसके अलावा, समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुललाह नदवी को भी प्रदर्शन के दौरान यूनिवर्सिटी के पास हिरासत में लिए जाने की खबर है।
छात्रों के आंदोलन और कैंपस में तनाव की वजह
यह पूरा विवाद 12 अक्टूबर 2026 से शुरू हुए एक छात्र आंदोलन से जुड़ा है। पांच छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं और उनकी मांगें काफी स्पष्ट हैं। वे 2006 से भंग हो चुके जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) की बहाली, चीफ प्रॉक्टर को हटाने और छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
हालात की गंभीरता को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 24 अक्टूबर को सभी क्लास ऑनलाइन कर दीं, लाइब्रेरी और कैंटीन बंद कर दिए और गेट नंबर 7 से प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया। प्रशासन का कहना है कि प्रोफेसरों की एक सात सदस्यीय समिति ने छात्रों के साथ चार दौर की बातचीत की है और 21 अक्टूबर को JMISU संविधान ड्राफ्ट कमेटी की घोषणा भी की गई थी।
दूसरी तरफ, मोहम्मद अयान खान, जसीम अली खान और अनस जैसे छात्र नेताओं ने प्रशासन के इन कदमों को 'दमनकारी' बताया है। उनका आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन नोटिस और सस्पेंशन के जरिए छात्रों को कैंपस से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है। वहीं, AISA और SFI जैसे संगठनों ने प्रशासन और पुलिस पर छात्रों के साथ मारपीट करने और उनकी आवाज दबाने का आरोप लगाया है। फिलहाल कैंपस में तनाव बना हुआ है और कुछ छात्र अब भी भूख हड़ताल पर हैं।