दिल्ली पुलिस ने बस में नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दाखिल की चार्जशीट

दिल्ली पुलिस ने 4 अगस्त 2026 को एक 16 वर्षीय लड़की के साथ चलती बस में हुए दुष्कर्म के मामले में बस चालक और कंडक्टर के खिलाफ 398 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इस मामले में मुख्य बातें निम्नलिखित हैं: - दिल्ली की एक अदालत ने 24 सितंबर 2026 को चार्जशीट पर संज्ञान लिया। - जांच में फोरेंसिक डीएनए साक्ष्यों, जैसे वीर्य के नमूने और बालों का इस्तेमाल किया गया है। - आरोपियों की पहचान बस चालक 39 वर्षीय कुलदीप और 26 वर्षीय कंडक्टर संदीप के रूप में हुई है, जो दोनों कानपुर के रहने वाले हैं। - सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर 2026 को इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया।
घटना और आरोपियों की जानकारी
पीड़िता उत्तर प्रदेश से अपने चचेरे भाई से मिलने के लिए यात्रा कर रही थी, तभी बस को उसके तय रास्ते से डायवर्ट कर दिया गया। बस ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के कश्मीरी गेट तक लगभग 47 किलोमीटर तक चलाई गई, जिसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया और उसे छोड़ दिया। सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को घटना के तुरंत बाद गिरफ्तार कर लिया था। इस संबंध में अधिक जानकारी ANI News पर उपलब्ध है।
चार्जशीट और कानूनी कार्रवाई
चार्जशीट में पुलिसकर्मियों और डॉक्टरों सहित 50 गवाहों के नाम शामिल किए गए हैं। इसमें अपहरण और गलत तरीके से बंधक बनाने के प्रावधानों के साथ-साथ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धारा 6 को भी लागू किया गया है। तीस हजारी अदालत 7 अक्टूबर 2026 को इस जोड़े के खिलाफ आरोप तय करने पर बहस सुनेगी।
नियामक विफलताएं और सुप्रीम कोर्ट का संज्ञान
इस घटना की जांच में गंभीर नियामक विफलताएं सामने आईं। प्रश्नगत वाहन के खिलाफ 11 पेंडिंग ट्रैफिक चालान थे—जिनमें से सात जुलाई में जारी किए गए थे—और उसमें पैनिक बटन तथा व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम जैसे अनिवार्य सुरक्षा उपकरण नहीं थे। इसके अलावा, बस में एक गैर-कार्यशील सीसीटीवी सिस्टम और भारी खिड़की के पर्दे थे, जबकि कर्मचारियों को बिना अनिवार्य पुलिस सत्यापन के काम पर रखा गया था। 28 सितंबर 2026 को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के निर्भया कांड से समानताएं बताते हुए इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में नाबालिगों की रक्षा करने में प्रशासनिक तथा कानून प्रवर्तन अधिकारियों की व्यवस्थित विफलता की आलोचना की।