दिल्ली पुलिस परिवारों ने जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन में हिंसा के खिलाफ की प्रेस कॉन्फ्रेंस, न्याय की मांग

दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिवारों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। परिवारों ने सार्वजनिक रूप से हिंसा का जिक्र किया और दावा किया कि अधिकारियों को लगातार हमलों और गंभीर चोटों का सामना करना पड़ा है। इस source के अनुसार, कई घायल अधिकारी अभी भी इलाज करा रहे हैं। परिवारों ने ऐसे वीडियो दिखाए जिनमें कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर हमले दिखाए गए और कहा कि छात्र प्रदर्शन में 'असामाजिक तत्व' घुस आए थे, तथा सोशल मीडिया नैरेटिव पर दुख जताया जिसमें कथित तौर पर घायल पुलिसकर्मियों को 'अपराधी' दिखाया गया था।
छात्रों और पुलिस के बीच झड़प और गंभीर चोटें
20 जुलाई 2026 को 'संसद चलो' मार्च के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़पों में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधानी के इस्तीफे की मांग की गई थी, जो कथित NEET-UG पेपर लीक को लेकर था। इन झड़पों में 100 से अधिक पुलिसकर्मियों सहित 200 से ज्यादा लोग घायल हुए। 25 जुलाई को, एक दिल्ली पुलिस सब-इंस्पेक्टर, जो एक पूर्व भारतीय नौसेना मरीन कमांडो हैं, को जंतर-मंतर पर मंच के पास कथित तौर पर 'एक उपद्रवी भीड़ द्वारा घसीटा गया और लगभग लिंच किया गया', जो आरएमएल अस्पताल में लगभग चार घंटे तक बेहोश रहे। उनकी वर्दी खून से सनी मिली। एक अन्य दिल्ली पुलिस असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर को 20 जुलाई को पथराव में घायल होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिससे उनका हेलमेट टूट गया था, जबकि दूसरे असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के बेटे ने बताया कि उनके पिता को सिर में चोट लगी जिसके लिए टांके लगाने पड़े।
CJP की प्रतिक्रिया और दिल्ली सरकार का आदेश
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने पुलिस परिवारों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर प्रतिक्रिया देते हुए घायल अधिकारियों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की, लेकिन आरोप लगाया कि पुलिस के खिलाफ हिंसा के लिए छात्र प्रदर्शनकारी नहीं बल्कि 'BJP गुंडे' जिम्मेदार थे। CJP प्रवक्ता रत्ना सिंह ने छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस बर्बरता पर भी प्रकाश डाला, जिसमें पैलेट गन, आंसू गैस, लाठी और यौन उत्पीड़न के इस्तेमाल का हवाला दिया गया। दिल्ली सरकार ने छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने का आदेश दिया, बशर्ते कुछ शर्तें पूरी हों, जबकि दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह विरोध प्रदर्शनकारियों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी, जिसमें फेशियल रिकग्निशन सिस्टम का उपयोग करके आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 व्यक्तियों की पहचान की गई, जिनमें गंभीर अपराधों में शामिल 989 लोग भी शामिल हैं।