Delhi Police ने इंटर-स्टेट 'डिजिटल अरेस्ट' फ्रॉड नेटवर्क का किया पर्दाफाश, 4 गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस के साउथ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के साइबर पुलिस स्टेशन ने एक इंटर-स्टेट साइबर-फ्रॉड फैसिलिटेशन नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जो "डिजिटल अरेस्ट" स्कैम के लिए जिम्मेदार था। अधिकारियों ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को घोषणा की कि इस कार्रवाई में पंजाब और राजस्थान से चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह जांच 15 अप्रैल 2026 को मुनिरका एन्क्लेव में रहने वाले एक रिटायर्ड इंडियन आर्मी कर्नल द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद शुरू की गई थी, जिनसे ₹15.5 लाख की ठगी की गई थी (Source)।
कैसे काम करता था यह फ्रॉड सिंडिकेट
अधिकारियों के अनुसार, यह सिंडिकेट ओवरसीज-लिंक फ्रॉड ऑपरेटर्स को एक्टिव बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने का काम करता था। यह गिरोह लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी बनकर, फर्जी एनफोर्समेंट डायरेक्टर वारंट, फर्जी बॉम्बे हाईकोर्ट के दस्तावेज और मैसेजिंग ऐप के जरिए भेजे गए नकली RBI निर्देश दिखाकर हाई-प्रोफाइल पीड़ितों को निशाना बनाता था। "डिजिटल अरेस्ट" प्रक्रिया के दौरान पीड़ितों को लगातार वीडियो सर्विलांस और मानसिक दबाव में रखा जाता था।
चार आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
हिरासत में लिए गए चार व्यक्तियों की पहचान 38 वर्षीय सरबजीत (जिसने अपना करंट अकाउंट दिया), 30 वर्षीय सूरज (जिसने अकाउंट हैंडओवर में मदद की), 32 वर्षीय संदीप (बैंक कर्मचारी जिसने ट्रांजैक्शन क्लियर किया), और 31 वर्षीय नरेश उर्फ लकी (जो बैंकिंग किट प्रोसेस करता था) के रूप में हुई है। लुधियाना के एक कमर्शियल बैंक खाते तक पहुंचे वित्तीय ट्रेल के आधार पर पंजाब के लुधियाना और राजस्थान के सीकर तथा जयपुर शहरों में गिरफ्तारियां की गईं। साउथ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।