कनॉट प्लेस में भारी सुरक्षा घेरा, दिल्ली पुलिस ने SFI और लेफ्ट कार्यकर्ताओं को लिया हिरासत में

देश की राजधानी में तनावपूर्ण माहौल के बीच रविवार को कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में भारी हंगामा देखने को मिला। दिल्ली पुलिस ने स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और विभिन्न वामपंथी संगठनों के कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। यह पूरी कार्रवाई उस समय हुई जब शहर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी थी और नागरिक अशांति का माहौल बना हुआ था। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर उतरे थे, लेकिन पुलिस ने उनकी सभा को गैरकानूनी करार देते हुए उन्हें वहां से हटा दिया।
पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने पहले से कोई सूचना नहीं दी थी, इसलिए इस जमावड़े को अवैध माना गया। राजधानी में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस के अलावा CRPF और RAF की करीब 30,000 जवानों की भारी तैनाती की गई थी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने, कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने के आरोप में 20 से ज्यादा FIR दर्ज की हैं। गौरतलब है कि इससे पहले शनिवार को भी राजधानी भर में करीब 2,500 लोगों को हिरासत में लिया गया था।
हिंसा के आरोप और कानूनी टकराव
हिरासत के दौरान हिंसा के गंभीर आरोप भी लगे हैं। SFI ने दावा किया है कि उनके अखिल भारतीय अध्यक्ष आदर्श एम साजी और दिल्ली सचिव सूरज एलामोन को पुलिस ने पीटा और हिरासत में लिया। आरोप है कि पुलिस वाहनों के अंदर भी उनके साथ मारपीट की गई। वहीं, आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए पुलिस पर प्रदर्शनों के दौरान वकीलों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया है।
तनाव केवल एक तरफा नहीं था; 10 अक्टूबर को डीडीयू मार्ग पर एक अलग घटना घटी, जहां हिंदू रक्षा दल के चार सदस्यों को छात्रों और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी और मारपीट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
इस पूरे विवाद और शहर में लगी पाबंदियों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को एक विशेष सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आम जनता और ट्रैफिक की आवाजाही बाधित नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से चलाने का आदेश दिया और कहा कि उन क्षेत्रों के बाहर किसी की अवैध हिरासत नहीं होगी जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू नहीं है। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका और सौरव दास को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के बाद निवारक हिरासत से रिहा कर दिया गया है।