दिल्ली में भारी बवाल: चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन, SFI और वामपंथी कार्यकर्ता हिरासत में

देश की राजधानी दिल्ली में इन दिनों जबरदस्त तनाव का माहौल है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर उतरे दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारी हिरासत और गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है। पुलिस ने स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और विभिन्न वामपंथी संगठनों के बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है। यह पूरी कार्रवाई राजधानी के कनॉट प्लेस और जंतर मंतर जैसे इलाकों में हुए बड़े प्रदर्शनों के बाद की गई है।
मामला तब और गरमाया जब 11 अक्टूबर 2026 को SFI, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) और ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन (AIYF) के कार्यकर्ताओं ने कनॉट प्लेस में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ थे और 'वोट चोरी' तथा चुनावी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को वापस लेने की मांग कर रहे थे। पुलिस ने इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया, जिसमें अकेले कनॉट प्लेस से ही करीब 200 लोग शामिल थे।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और दर्ज हुई दर्जनों FIR
दिल्ली पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब तक 20 से ज्यादा FIR दर्ज की हैं। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए नई दिल्ली जिले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 लागू कर दी गई है। वहीं, नोएडा में भी 20 अक्टूबर तक निषेधाज्ञा लागू है। पुलिस भीड़ पर नजर रखने के लिए बॉडी कैमरों और सर्विलांस ड्रोन का इस्तेमाल कर रही है।
हिंसा और हंगामे के बीच पुलिस ने कुछ अन्य सख्त कार्रवाई भी की है। 10 अक्टूबर को डीडीयू मार्ग पर प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट और महिलाओं से बदसलूकी करने के आरोप में 'हिंदू रक्षा दल' के चार सदस्यों—रमन सैनी, विवेकानंद, कपिल कुमार और रविंदर सिंह को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा, 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके, सौरभ दास और आशुतोष रंका को भी हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में 50,000 रुपये की जमानत पर रिहा किया गया।
इन सबके बीच, 10 अक्टूबर से शुरू हुए इस नागरिक असंतोष के दौर में अब तक दिल्ली में करीब 1,500 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। SFI के नेतृत्व ने पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और साफ किया है कि वे दबाव में नहीं आएंगे और अपनी मांगों को पूरा होने तक संघर्ष जारी रखेंगे।