जंतर मंतर पर बवाल: CEC के खिलाफ प्रदर्शन रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने हजारों को लिया हिरासत में

राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ होने वाले एक बड़े विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने शनिवार को कड़ा रुख अपनाया। पुलिस ने सुरक्षा कारणों और अनुमति न होने का हवाला देते हुए हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। यह पूरा मामला चुनावी मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision) में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ, जिसके विरोध में 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की थी।
पुलिस ने शहर को पूरी तरह किलेबंद कर दिया था ताकि प्रदर्शनकारी जंतर मंतर न पहुंच सकें। इस दौरान करीब 45 मेट्रो स्टेशनों की सेवाओं पर पाबंदी लगा दी गई। कार्रवाई इतनी सख्त थी कि मुंबई से एयर इंडिया की फ्लाइट से पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत डिपके और सह-संयोजक सौरव दास व आशुतोष रंका को सुबह करीब 10:20 बजे ही हिरासत में ले लिया गया। इतना ही नहीं, पुलिस ने गुरुग्राम स्थित उनके आवास से मशहूर इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को भी हिरासत में लिया।
बड़े नेताओं की गिरफ्तारी और शहर की स्थिति
प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने केवल कार्यकर्ताओं को ही नहीं, बल्कि कई दिग्गज विपक्षी नेताओं को भी निशाना बनाया। ममता बनर्जी को साउथ एवेन्यू के पास, अरविंद केजरीवाल को उनके आवास के करीब और पिनारायी विजयन को केरल हाउस के पास से हिरासत में लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कड़ा बयान देते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शनों के नाम पर शहर को बंधक नहीं बनाया जा सकता।
इस कार्रवाई के बीच सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर को एक अहम टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि परिवहन सेवाओं को पूरी तरह बंद करना गलत है और अधिकारियों को आनुपातिकता के सिद्धांत का पालन करते हुए जनता की आवाजाही सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके बावजूद, शहर के कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए।
विवाद की मुख्य जड़ चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों से नाम हटाने की प्रक्रिया है। विपक्ष का आरोप है कि कई राज्यों में करीब 13 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया डुप्लीकेट और मृत लोगों के नाम हटाने के लिए जरूरी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने करीब 2,000 से 7,000 लोगों को प्रिवेंटिव कस्टडी में लिया था। रविवार सुबह तक अधिकांश लोगों को रिहा कर दिया गया और मेट्रो सेवाएं भी सामान्य हो गईं। हालांकि, कॉकरोच जनता पार्टी ने साफ कर दिया है कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते, उनका संघर्ष जारी रहेगा।