जंतर मंतर पर भारी पुलिस बल: ध्रुव राठी समेत कई दिग्गज नेता हिरासत में, दिल्ली में हाई अलर्ट

राजधानी दिल्ली का जंतर मंतर एक बार फिर हंगामे का केंद्र बन गया है, लेकिन इस बार पुलिस ने विरोध प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही मोर्चा संभाल लिया। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा आयोजित 'जंतर मंतर 2.0' प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने करीब 15,000 जवानों की भारी तैनाती की है। इस पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कई राजनीतिक दिग्गजों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को हिरासत में ले लिया है ताकि प्रदर्शन को शुरू ही न होने दिया जा सके।
इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना और चुनावी सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की प्रक्रिया को वापस लेना था। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से जंतर मंतर के 4 किलोमीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है।
बड़े चेहरों पर पुलिस का शिकंजा, ठप हुई दिल्ली की रफ्तार
पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई में कई नामी चेहरे फंसे हैं। यूट्यूबर ध्रुव राठी को उनके गुरुग्राम स्थित आवास से हिरासत में लिया गया, जबकि सीपीआई(एम) नेता बृंदा करात और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को केरल भवन से निकलते समय पुलिस ने पकड़ लिया। वहीं, CJP के संस्थापक अभिजीत डिपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रंका को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचते ही हिरासत में ले लिया गया। पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह भी पुलिस की गिरफ्त में हैं।
इस सुरक्षा घेरे का असर दिल्ली की आम जनजीवन पर भी साफ दिखा। जंतर मंतर के आसपास मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं, जिससे संचार व्यवस्था ठप हो गई। दिल्ली मेट्रो के 45 से 57 स्टेशनों को बंद करना पड़ा और नई दिल्ली व हजरत निजामुद्दीन स्टेशनों पर जाने वाली 250 से अधिक ट्रेनें रद्द कर दी गईं।
दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त नुपुर प्रसाद और ट्रैफिक पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त दिनेश कुमार गुप्ता ने स्पष्ट किया कि इस प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई थी क्योंकि आवेदन सही तरीके से नहीं भरा गया था और इससे सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने का खतरा था। हालांकि, CJP का दावा है कि देशभर में लगभग 10,000 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि दिल्ली में मौके से 150 से 500 प्रदर्शनकारियों को बसों में भरकर डिटेंशन सेंटर्स भेजा गया है।