चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन: दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन, 2000 लोग हिरासत में

देश की राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच पुलिस ने अब तक कड़ा रुख अपनाया है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन में करीब 2000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। यह पूरा मामला चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) के विरोध से जुड़ा है, जिसे लेकर विपक्षी दलों और कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूचियों में किए गए बदलावों की वजह से लाखों वोटरों को उनके अधिकार से वंचित किया गया है। इसी मांग को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के बैनर तले यह रैली आयोजित की जा रही थी। हालांकि, पुलिस ने सुरक्षा कारणों और नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। हालात को काबू में रखने के लिए नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 लागू कर दी गई।
सुरक्षा का कड़ा पहरा और शहर की रफ्तार थमी
इस बड़े crackdown को अंजाम देने के लिए दिल्ली पुलिस ने भारी बल तैनात किया था। खबरों के मुताबिक, बीएसएफ (BSF) के जवानों समेत लगभग 23,000 से 38,000 सुरक्षाकर्मी सड़कों पर उतारे गए। केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि प्रशासन ने डिजिटल और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पर भी लगाम लगा दी। मध्य दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं, जबकि 45 से 57 दिल्ली मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वारों पर पाबंदियां लगाई गईं। इतना ही नहीं, नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों को बंद करने के कारण 250 से अधिक ट्रेनों को रद्द करना पड़ा।
हिरासत में लिए गए लोगों में कई बड़े नाम शामिल हैं। इनमें CJP संस्थापक अभिजीत डिपके, सौरव दास, आशुतोष रंका और मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी शामिल हैं। इसके अलावा, राजनीति के दिग्गजों की सूची भी लंबी है, जिसमें राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी और पिनाराई विजयन जैसे नेता शामिल रहे। साथ ही योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और अतिशी मार्लेना जैसे एक्टिविस्ट और नेता भी इस कार्रवाई की चपेट में आए।
इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP प्रमुख अभिजीत डिपके ने इसे असहमति को कुचलने की एक सोची-समझी साजिश बताया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सरकार की कठपुतली होने का आरोप लगाया, जबकि योगेंद्र यादव ने राजधानी में लोकतांत्रिक विरोध के अधिकारों पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस पूरे घटनाक्रम और राहुल गांधी की इसमें भूमिका की आलोचना की है। वहीं, चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मतदाता सूची का संशोधन केवल डुप्लीकेट और अपात्र प्रविष्टियों को हटाने के लिए किया गया है।