CEC के इस्तीफे की मांग पर बवाल: जंतर मंतर मार्च रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने 3000 से ज्यादा लोगों को लिया हिरासत में

देश की राजधानी दिल्ली में शनिवार को उस समय भारी तनाव देखा गया जब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हजारों प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन का मकसद मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision) पर विरोध जताना था। पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे, जिसके चलते एक भी प्रदर्शनकारी जंतर मंतर तक नहीं पहुंच सका।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि आयोजकों ने निर्धारित 10 दिन पहले नोटिस नहीं दिया था, इसलिए इस कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिन भर में करीब 3,000 से 7,000 लोगों को हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई के लिए दिल्ली पुलिस ने करीब 25,000 से 60,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की थी। हालात इतने गंभीर थे कि हिरासत में लिए गए लोगों को रखने के लिए कुछ स्टेडियमों और सामुदायिक केंद्रों को अस्थायी हिरासत केंद्रों में बदल दिया गया।
मेट्रो और ट्रेनों पर पड़ा असर, इंटरनेट सेवा भी ठप
इस सुरक्षा घेराबंदी का असर आम जनता पर भी पड़ा। शहर के करीब 45 से 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए गए, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी हुई। वहीं, सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन जाने वाली 35 से अधिक ट्रेनें रद्द या रीशेड्यूल कर दी गईं। जंतर मंतर के आसपास 4 किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित कर दी गईं।
इस प्रदर्शन के दौरान कई बड़े चेहरे भी पुलिस की गिरफ्त में आए, जिनमें अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी और पिनाराई विजयन जैसे दिग्गज नेता शामिल थे। इसके अलावा कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके, सौरव दास, आशुतोष रंका और यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी हिरासत में लिया गया। पुलिस ने बताया कि पथराव की घटनाओं में दो पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रशासन को 'मक्खी मारने के लिए हथौड़े' का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और मेट्रो व ट्रेन सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध से बचने का निर्देश दिया। हालांकि, इसके बावजूद मेट्रो बंद रहने पर अवमानना याचिका दायर की गई है।
राजनीतिक गलियारों में इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं हैं। जहां भाजपा ने इसे 'फ्लॉप शो' और 'मोबocracy' करार दिया, वहीं विपक्षी दलों ने शहरव्यापी लॉकडाउन को 'अघोषित आपातकाल' बताया है। कॉकरोच जनता पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूचियों से नाम हटाना एक तरह की 'वोट चोरी' है। यह पार्टी अब रविवार, 11 अक्टूबर को फिर से मार्च निकालने की तैयारी में है।