CEC के इस्तीफे की मांग पर प्रदर्शन: दिल्ली पुलिस ने कई पत्रकारों को लिया हिरासत में

देश की राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान हालात तब तनावपूर्ण हो गए, जब दिल्ली पुलिस ने पत्रकारों को हिरासत में लिया। 10 और 11 अक्टूबर 2026 को हुए इस घटनाक्रम में मीडिया कर्मियों को न केवल रोका गया, बल्कि उन्हें हिरासत में लेकर स्टेडियमों में ले जाया गया। इनमें द इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के शाश्वत, सिया और विजय समेत हिंदुस्तान टाइम्स, पीटीआई, द क्विंट, द वायर और स्क्रॉल जैसे बड़े मीडिया संस्थानों के पत्रकार शामिल थे। वरिष्ठ पत्रकार परनजॉय गुहा ठाकुरता को भी पुलिस ने डिटेन किया।
यह पूरा मामला कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों का है, जहां कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य समूहों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार को कुल 7,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली के इस क्षेत्र में पांच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी थी, इसलिए कार्रवाई की गई। हालांकि, पत्रकारों का आरोप है कि उनके पास वैध आईडी कार्ड होने के बावजूद उन्हें निशाना बनाया गया और उनके उपकरण जब्त कर लिए गए।
इंटरनेट ब्लैकआउट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने विरोध स्थलों के 4 किलोमीटर के दायरे और आठ स्टेडियमों (जिन्हें हिरासत केंद्र बनाया गया था) में 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया था। CJP नेताओं ने गंभीर आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनके फोन जब्त किए, जिससे डेटा चोरी या क्लोनिंग की आशंका बढ़ गई है।
इस कार्रवाई के बाद प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI), इंडियन विमेन प्रेस कॉर्प्स (IWPC) और दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (DUJ) जैसे संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने पुलिस से उपकरणों की वापसी, सार्वजनिक माफी और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग की है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों की रिहाई की अपील की, जिसे भारत के जेनेवा मिशन ने "अनुचित हस्तक्षेप" बताकर खारिज कर दिया।
हैरानी की बात यह है कि 11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि पेशेवर ड्यूटी कर रहे पत्रकारों को परेशान या हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक कोर्ट की टिप्पणी के बाद भी पुलिस की कार्रवाई जारी रही।