CEC के इस्तीफे की मांग पर बवाल, जंतर मंतर मार्च के दौरान 150 कार्यकर्ता हिरासत में

देश की राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को जब बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पटेल चौक से जंतर मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे थे, तब दिल्ली पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। यह पूरा विरोध प्रदर्शन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ किया जा रहा था।
नयी दिल्ली जिले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने पूरे इलाके को बैरिकेड्स से घेर लिया था ताकि कोई भी प्रदर्शनकारी आगे न बढ़ सके। प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 लागू कर रखी थी, जिसके तहत बिना अनुमति के किसी भी तरह की सभा, सार्वजनिक भाषण या प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक थी। दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस विरोध प्रदर्शन के लिए न तो कोई अनुमति ली गई थी और न ही इसकी कोई पूर्व सूचना दी गई थी।
भारी पुलिस बल की तैनाती और कानूनी कार्रवाई
यह टकराव केवल शनिवार तक सीमित नहीं था। इससे पहले 2 अक्टूबर को भी पुलिस ने करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लिया था। उस दौरान पार्लियामेंट स्ट्रीट और कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशनों में तीन FIR दर्ज की गई थीं। इन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत लोक सेवक के आदेशों की अवज्ञा, बाधा डालने और आपराधिक बल के प्रयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में योगेंद्र यादव और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण जैसे बड़े चेहरे भी हिरासत में रहे। योगेंद्र यादव ने तर्क दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है, जबकि प्रशांत भूषण ने पुलिस की कार्रवाई को जनता की आवाज दबाने की कोशिश करार दिया। वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा के साथ हिरासत के दौरान बदसलूकी की गई।
इस प्रदर्शन में इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC), स्वराज इंडिया, NSUI, SFI और ASAP जैसे संगठनों ने हिस्सा लिया, जिन्हें टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा का भी समर्थन मिला। दूसरी ओर, इंडियन यूथ कांग्रेस ने पुलिस की इस पाबंदी को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है। कांग्रेस का तर्क है कि नियमन के नाम पर शांतिपूर्ण सभाओं पर रोक लगाना गलत है। फिलहाल, दिल्ली पुलिस ने चेतावनी दी है कि निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।