जंतर मंतर अब विरोध प्रदर्शन का स्थल नहीं, दिल्ली पुलिस ने हटाया नाम; व्यापारियों में डर

राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों का केंद्र रहा जंतर मंतर अब आधिकारिक तौर पर प्रोटेस्ट साइट नहीं रहा। दिल्ली पुलिस ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को इसे 'डी-नोटिफाई' कर दिया है। पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार द्वारा जारी आदेश के बाद अब यहां प्रदर्शन करने पर पाबंदी होगी। यह फैसला 2022 के पुराने आदेश में बदलाव करते हुए लिया गया है।
गृह मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के सुझावों के बाद यह कदम उठाया गया है। अदालत ने बेहतर सुविधाओं वाले स्थलों की पहचान करने की बात कही थी। अब प्रदर्शनकारियों के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को विकल्प के तौर पर तय किया गया है।
राजनीतिक हंगामा और आर्थिक संकट
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और INDIA गठबंधन द्वारा चुनावी रोल में गड़बड़ियों को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे। हालिया प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिया था और इंटरनेट सेवाएं भी बंद करनी पड़ी थीं। ट्रैफिक पुलिस के अतिरिक्त कमिश्नर दिनेश कुमार गुप्ता ने बताया कि अशांति के कारण भारी पुलिस बल और ट्रैफिक नियमों की सख्ती जरूरी हो गई थी।
इस फैसले पर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने इसे मौलिक अधिकारों पर हमला बताया है, वहीं कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे सरकार की घबराहट का संकेत कहा है।
दूसरी ओर, जंतर मंतर के आसपास के छोटे व्यापारियों के लिए यह फैसला किसी झटके से कम नहीं है। वहां सन्नाटा पसर गया है और रेहड़ी-पटरी वालों को भारी नुकसान की आशंका है। फूड स्टॉल चलाने वाले विजय गुप्ता और पान दुकानदार अजय कुमार का कहना है कि उनकी मासिक कमाई में 40% तक की गिरावट आ सकती है। न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) और चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने भी इस आर्थिक नुकसान पर अपनी चिंता जताई है।
अब इस पूरे मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट में होगी। भारतीय युवा कांग्रेस ने प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के खिलाफ याचिका दायर की है, जिस पर 13 अक्टूबर 2026 को सुनवाई होनी है।