जंतर मंतर अब नहीं होगा विरोध का केंद्र, दिल्ली पुलिस ने बदला नियम

राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के लिए सबसे चर्चित जगह रहा जंतर मंतर अब आधिकारिक तौर पर प्रदर्शन स्थल नहीं रहा। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर 2026 को इसे डी-नोटिफाई कर दिया है। यह फैसला गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा गठित एक समिति की सिफारिशों के बाद लिया गया है। अब प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर के बजाय तीन नए विकल्पों—रामलीला ग्राउंड, बुरारी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड का रुख करना होगा।
इस बड़े बदलाव से पहले, 10 अक्टूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत नई दिल्ली में निषेधाज्ञा लागू की गई थी, जिसके तहत बिना लिखित अनुमति के पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई थी। पुलिस जल्द ही प्रदर्शनों के लिए एक नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी जारी करेगी।
व्यापारियों में खुशी, राजनीतिक दलों में नाराजगी
इस फैसले ने दिल्ली में दो अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं। एक तरफ न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने इसका स्वागत किया है। एसोसिएशन के संयुक्त सचिव अमित गुप्ता का कहना है कि इससे कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। उनका दावा है कि जंतर मंतर के पास स्थित बैंकों और रेस्टोरेंट्स को पिछले वीकेंड में ही 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ, जबकि कनॉट प्लेस को करीब 150-200 करोड़ रुपये की चपत लगी।
हालांकि, हर कोई इस फैसले से खुश नहीं है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) और ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (AIMGTA) ने रामलीला मैदान को विकल्प बनाने पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि इससे थोक बाजारों और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में भारी व्यवधान पैदा होगा।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके और सह-संयोजक सौरव दास ने इसे मनमाना फैसला करार दिया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि "अब पूरा देश जंतर मंतर बनेगा" और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक विरोध जारी रहेगा।
इसी बीच, 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने मामला विचाराधीन होने के कारण उनसे मिलने से इनकार कर दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 11 अक्टूबर को एक विशेष सत्र में निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाए, बैरिकेड्स हटाए जाएं और दिल्ली मेट्रो जैसी सार्वजनिक सेवाओं को सामान्य रखा जाए।