जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं: दिल्ली पुलिस ने पूर्व BSF कर्मियों और CJP को रोका

देश की राजधानी में विरोध प्रदर्शनों के केंद्र जंतर मंतर पर एक बार फिर सख्ती देखने को मिली है। दिल्ली पुलिस ने पूर्व सीमा सुरक्षा बल (BSF) के कर्मियों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित किए जाने वाले प्रदर्शनों की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। पुलिस का कहना है कि नियमों का पालन न करना और सुरक्षा कारणों की वजह से ये फैसले लिए गए हैं।
मामला पहले पूर्व BSF कर्मियों से जुड़ा है, जिन्होंने अपनी सेवा से बर्खास्तगी के खिलाफ दो दिनों तक भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी। करीब 400 पूर्व कर्मियों के इस अनुरोध को दिल्ली पुलिस ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मौजूदा गाइडलाइंस के तहत एक दिन से अधिक का निरंतर आंदोलन अनुमति के दायरे में नहीं आता और इस तरह की भूख हड़ताल गैरकानूनी है। इस वजह से, 9 अक्टूबर 2026 को इन कर्मियों ने अपना प्रदर्शन मध्य दिल्ली स्थित BSF मुख्यालय के बाहर फुटपाथ पर करने का फैसला किया।
नियमों की अनदेखी और सुरक्षा का हवाला
दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी की थी, लेकिन उन्हें भी हरी झंडी नहीं मिली। जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस नूपुर प्रसाद ने स्पष्ट किया कि CJP ने प्रदर्शन के लिए अनिवार्य 10 दिन पहले नोटिस नहीं दिया था। साथ ही, पुलिस नियमों का पुराना पालन न करना और इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। पुलिस ने यह भी बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है, जिससे कोई भी अनाधिकृत जमावड़ा अवैध माना जाएगा।
दिल्ली पुलिस की गाइडलाइंस के मुताबिक, जंतर मंतर पर किसी भी प्रदर्शन के लिए न्यू दिल्ली जिले के डीसीपी से पूर्व अनुमति लेना जरूरी है। यहाँ अधिकतम 1,000 लोगों के जमा होने की अनुमति है और यह प्रदर्शन केवल एक दिन के लिए हो सकता है। यदि प्रदर्शनकारियों की संख्या इससे ज्यादा होती है, तो उन्हें रामलीला मैदान या बुराड़ी जैसे स्थानों पर जाने का सुझाव दिया जाता है।
हालांकि, भूख हड़ताल के मामले में पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया, लेकिन कानूनी जानकारों का मानना है कि शांतिपूर्ण उपवास संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत संरक्षित अधिकारों के दायरे में आता है।