जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों को लेकर दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा, बैन की सभी अफवाहें निकलीं झूठी!

दिल्ली और एनसीआर के लोगों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। दिल्ली पुलिस ने गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को उन सभी सोशल मीडिया अफवाहों को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि जंतर-मंतर को प्रदर्शनों के लिए बंद या सील कर दिया गया है। अधिकारियों ने इन दावों को पूरी तरह से फर्जी, भ्रामक और तथ्यों से परे बताया है। पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए साफ किया है कि जंतर-मंतर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए एक 'सक्रिय और अधिकृत स्थल' (Active and Authorised Site) बना हुआ है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी तरह की बिना वेरिफाइड जानकारी पर विश्वास न करें और न ही उसे आगे शेयर करें, बल्कि हमेशा आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा रखें।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए क्या हैं नियम?
दिल्ली पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर पर अधिकतम 1,000 लोगों के इकट्ठा होने की ही अनुमति है। यह अनुमति सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिवत आवेदन मिलने के बाद ही दी जाती है, बशर्ते तय किए गए नियमों और शर्तों का पूरी तरह पालन किया जाए। ये नियम सुप्रीम कोर्ट के आदेश और दिल्ली पुलिस द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के बिल्कुल मुताबिक हैं, ताकि सार्वजनिक आयोजनों को सुचारू रूप से चलाया जा सके। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप Delhi Breakings पर अपडेट्स देख सकते हैं।
FIR वापसी और घायल छात्र को मिली अस्पताल से छुट्टी
पुलिस की यह सफाई ऐसे समय में आई है जब इस जगह पर कई बड़ी गतिविधियां चल रही हैं। उसी दिन, दिल्ली सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ चले 37 दिनों के आंदोलन से जुड़े 13 FIR वापस लेने की मंजूरी दे दी है। यह आंदोलन 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रadhan के इस्तीफे के बाद खत्म हुआ था। हालांकि, इस केस वापसी में उन लोगों को शामिल नहीं किया गया है जिनका क्रिमिनल बैकग्राउंड है। इसके अलावा, 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए संघर्ष में गंभीर रूप से घायल हुआ 21 साल का एक प्रदर्शनकारी छात्र 10 दिन के इलाज के बाद राम मनोहर लोहिया अस्पताल से डिस्चार्ज हो गया है।
विपक्ष की मांग और छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन
दूसरी तरफ, 29 जुलाई को बुधवार को लेफ्ट से जुड़े छात्र संगठनों ने हिरासत में लिए गए छात्रों की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। इस बीच राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान छात्र आंदोलकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र हाई-पावर कमेटी बनाने की मांग की है।