दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में किया धारा 163 प्रतिबंधों का बचाव, बताया कारण
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जंतर मंतर और इंडिया गेट जैसे संवेदनशील इलाकों में धारा 163 लगाना क्यों जरूरी था।

अक्टूबर महीने के दौरान राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर दिल्ली पुलिस अब सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रख रही है। दिल्ली पुलिस धारा 163 प्रतिबंध (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता - BNSS) के तहत उठाए गए कदमों को सही ठहराते हुए अदालत में एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल किया है। पुलिस का कहना है कि शहर की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए ये कड़े कदम उठाना बेहद जरूरी था।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने अदालत को बताया कि नई दिल्ली जिला एक बेहद संवेदनशील इलाका है। यहां संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट और जंतर मंतर जैसे महत्वपूर्ण स्थान हैं, जहां सुरक्षा में चूक बड़ी मुसीबत बन सकती है। पुलिस ने जुलाई 2026 में NEET पेपर लीक के विरोध प्रदर्शनों के दौरान पैदा हुए कानून-व्यवस्था के संकट का हवाला देते हुए कहा कि बड़ी भीड़ जमा होने से न केवल आम जनजीवन प्रभावित होता है और ट्रैफिक जाम लगता है, बल्कि यह लोगों की जान के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है।
इन इलाकों में लागू थे पाबंदियां
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद दिल्ली पुलिस ने कुल सात आदेश पेश किए हैं। ये प्रतिबंध मुख्य रूप से इन इलाकों में लागू थे:
- कनॉट प्लेस और तुगलक रोड
- पार्लियामेंट स्ट्रीट और चाणक्यपुरी
- बाराखंबा रोड, सफदरजंग एन्क्लेव और डिफेंस कॉलोनी
इन आदेशों के तहत पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने, सार्वजनिक सभाओं और विरोध रैलियों पर रोक लगाई गई थी। यह कार्रवाई विशेष रूप से उन प्रदर्शनों के दौरान की गई थी, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की जा रही थी।
गौरतलब है कि सीपीआई(एम) नेता एम.ए. बेबी और अन्य लोगों ने इन प्रतिबंधों और प्रदर्शनकारियों की हिरासत को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। इससे पहले 11 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम निर्देश देते हुए स्पष्ट किया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन एक मौलिक अधिकार है और निहत्थे प्रदर्शनकारियों को अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट परिसर से धारा 163 के नोटिस हटाने का भी आदेश दिया था। अब अदालत इस पूरे मामले की समीक्षा कर रही है।