जंतर मंतर प्रदर्शन: दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, सभी 57 FIR की जांच अब क्राइम ब्रांच करेगी
दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर विरोध प्रदर्शन से जुड़ी सभी 57 FIRs की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। जानें क्या है पूरा मामला।

राजधानी दिल्ली में 'जंतर मंतर 2.0' विरोध प्रदर्शनों को लेकर पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले से जुड़ी सभी 57 प्रथम सूचना रिपोर्टों (FIR) की जांच अब अपनी विशेष इकाई, क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। 23 अक्टूबर 2026 को हुई इस घोषणा का मकसद इन संवेदनशील मामलों की जांच में तेजी लाना और पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है। इससे पहले केवल दो FIR क्राइम ब्रांच के पास थीं, लेकिन अब सभी मामलों को एक ही छत के नीचे लाया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख नेता आशुतोष रंका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे अपने वकीलों के साथ मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे, जहां क्राइम ब्रांच ने उनसे पूछताछ की। दरअसल, यह विवाद 13 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ था, जब CJP के सदस्यों ने जंतर मंतर के उस इलाके में प्रवेश किया जिसे पुलिस ने विरोध प्रदर्शन के लिए डी-नोटिफाई (अमान्य) कर दिया था।
चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और कानूनी पेंच
CJP के नेतृत्व में यह विरोध प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी विशेष गहन संशोधन (SIR) के जरिए मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों का विरोध कर रहे हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस के नियमों के मुताबिक, जंतर मंतर पर किसी भी प्रदर्शन के लिए 10 दिन पहले अनुमति लेना जरूरी है और अधिकतम 1,000 लोगों की भीड़ की अनुमति होती है।
कानूनी मोर्चे पर, विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट रितु राज के सामने रंका और दास ने 50,000 रुपये के व्यक्तिगत और जमानत बांड पर लिखित आश्वासन दिया था। उन्होंने वादा किया था कि वे शांति बनाए रखेंगे और जब तक जंतर मंतर को दोबारा आधिकारिक तौर पर विरोध स्थल घोषित नहीं किया जाता, वहां किसी प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे।
इन 57 FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इनमें शामिल हैं:
- सरकारी कर्मचारी के आदेशों की अवज्ञा करना।
- निषेधाज्ञा आदेशों का उल्लंघन।
- अनाधिकृत प्रवेश (Trespass)।
- सरकारी कर्मचारियों के साथ मारपीट।
- पुलिस ड्यूटी में बाधा डालना।
- एक मामले में आपराधिक साजिश रचने का आरोप।
तनावपूर्ण माहौल के बीच 23 अक्टूबर को भी प्रदर्शन जारी रहे, जिसके चलते दिल्ली पुलिस को बंगला साहिब गुरुद्वारा और जंतर मंतर के आसपास ट्रैफिक एडवाइजरी जारी करनी पड़ी। पुलिस ने दिनभर में कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जबकि CJP ने साफ कर दिया है कि वे मतदाता सूची संशोधन के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।