जंतर मंतर विरोध प्रदर्शन: दिल्ली पुलिस कांस्टेबल ने लगाया हमला और वर्दी फाड़ने का आरोप

देश की राजधानी दिल्ली में जंतर मंतर के पास हुए विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन के दौरान एक गंभीर मामला सामने आया है। ड्यूटी पर तैनात दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल, अंकित कसाना ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें बुरी तरह चोट पहुँचाई। यह घटना बुधवार को उस समय हुई जब इंडिया गठबंधन के सांसदों का प्रदर्शन चल रहा था और सुरक्षाकर्मियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को हिरासत में लिया था।
पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में तैनात कांस्टेबल अंकित कसाना उस समय भीड़ को नियंत्रित करने की ड्यूटी पर थे। उन्होंने मीडिया को बताया कि जब राहुल गांधी को हिरासत में लेकर उनकी कार को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की जा रही थी, तब कुछ प्रदर्शनकारियों ने रास्ता रोक लिया। अंकित के मुताबिक, कुछ लोग कार के आगे लेट गए और उसे धक्का देने लगे। इसी बीच एक निजी वाहन ने रास्ता बाधित किया, जिसमें कांग्रेस समर्थक सवार थे।
हिरासत के दौरान मची अफरा-तफरी और मारपीट
कांस्टेबल कसाना ने आरोप लगाया कि जब राहुल गांधी को हिरासत में लिया जा रहा था, तब करीब 30 से 35 पुरुषों और महिलाओं की भीड़ ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने बताया कि भीड़ ने उनके साथ गाली-गलौज की, उनकी वर्दी फाड़ दी, नाखूनों से खरोंचा और यहाँ तक कि उन्हें काट भी लिया। अंकित ने कहा, "कुछ लोग कार की चाबियाँ छीनने की कोशिश कर रहे थे। जब मैं उन्हें हटाने पहुँचा, तो पीछे से किसी ने मेरा कॉलर पकड़ लिया और मेरी वर्दी का बटन तोड़ दिया।"
इस घटना के बाद घायल कांस्टेबल को इलाज के लिए राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि पुलिस हमेशा जनता की मदद करती है, लेकिन ऐसी हरकतें भरोसे को तोड़ती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि चाहे कितनी भी प्रताड़ना मिले, वे शांतिपूर्वक अपना कर्तव्य निभाएंगे और कानून-व्यवस्था बनाए रखेंगे।
इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस ने अब तक तीन एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं। इन मामलों में सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी और मारपीट जैसी धाराएं लगाई गई हैं। एफआईआर के विवरण में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के नाम भी शामिल हैं।
बता दें कि यह पूरा विवाद निर्वाचन नामावली के विशेष गहन संशोधन (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ था। पुलिस के अनुसार, इंडिया गठबंधन ने संसद भवन से निर्वाचन सदन तक मार्च निकालने की योजना बनाई थी, जिसके लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी। इस दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई नेताओं को हिरासत में लिया गया था।