दिल्ली पुलिस ने नाबालिग से रेप मामले में बस ड्राइवर और कंडक्टर के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

Kittu Kumari30 September 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली पुलिस ने नाबालिग से रेप मामले में बस ड्राइवर और कंडक्टर के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

दिल्ली पुलिस ने 4 अगस्त 2026 को 16 साल की नाबालिग लड़की के साथ चलती बस में हुए बलात्कार के मामले में 398 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। इस मामले में एक शहर की अदालत ने 24 सितंबर 2026 को चार्जशीट पर संज्ञान लिया है। इस दिल्ली कोर्ट केस की चार्जशीट में डीएनए साक्ष्यों, सीमेन सैंपल और बालों के स्ट्रैंड्स का इस्तेमाल किया गया है जो आरोपियों को अपराध से जोड़ते हैं।

घटना की पूरी जानकारी और आरोपियों की पहचान

पीड़ित लड़की उत्तर प्रदेश से अपने चचेरे भाई से मिलने जा रही थी, तभी बस को उसके तय रास्ते से हटा दिया गया था। ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के कश्मीरी गेट तक लगभग 47 किलोमीटर तक बस चलाई गई, जिसके बाद आरोपियों ने नाबालिग के साथ कथित तौर पर रेप किया और उसे छोड़कर भाग गए। आरोपियों की पहचान बस ड्राइवर 39 वर्षीय कुलदीप और कंडक्टर 26 वर्षीय संदीप के रूप में हुई है, जो दोनों कानपुर के रहने वाले हैं। सीसीटीवी फुटेज की जांच के तुरंत बाद इन दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया था।

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कानूनी कार्रवाई और चार्जशीट के मुख्य बिंदु

चार्जशीट में पुलिसकर्मियों और डॉक्टरों सहित 50 गवाहों के नाम शामिल हैं। इसमें बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण यानी पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की धारा 6 के साथ-साथ अपहरण और गलत तरीके से बंधक बनाने से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधानों को लागू किया गया है। तीस हजारी कोर्ट में 7 अक्टूबर 2026 को इस मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर सुनवाई होनी है।

प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था की कमियां

इस घटना की जांच में गंभीर नियामक विसंगतियां सामने आई हैं। जिस वाहन का इस्तेमाल किया गया था, उस पर 11 पेंडिंग ट्रैफिक चालान थे, जिनमें से सात चालान जुलाई में जारी किए गए थे। बस में पैनिक बटन और व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम जैसे जरूरी सुरक्षा उपकरण नहीं थे। इसके अलावा, बस का सीसीटीवी सिस्टम काम नहीं कर रहा था और खिड़कियों पर भारी पर्दे लगे हुए थे। स्टाफ को भी बिना अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन के रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर 2026 को 2012 के निर्भया मामले से समानता बताते हुए इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में नाबालिगों की सुरक्षा में प्रशासनिक और कानून प्रवर्तन अधिकारियों की विफलता की आलोचना की।

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