मणिपुरी शिक्षक की मॉब लिंचिंग: दिल्ली पुलिस ने 7 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

दिल्ली पुलिस ने राजधानी के किलोकरी इलाके में एक 55 वर्षीय मणिपुरी संगीत शिक्षक, चोगथम विक्रम सिंह की बेरहमी से की गई मॉब लिंचिंग के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों के खिलाफ साकेत कोर्ट में औपचारिक चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह घटना सितंबर 2026 की है, जिसने न केवल शहर को दहला दिया था, बल्कि नस्लीय हिंसा की बहस को भी तेज कर दिया था।
पुलिस की चार्जशीट में जिन सात लोगों को नामजद किया गया है, उनमें भारत, दीपांशु, रमजान, मन्नू, मोहन सिंह, विजय कुमार और प्रमोद शामिल हैं। इस मामले में एक नाबालिग को भी पकड़ा गया था। जांच के मुताबिक, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब विक्रम सिंह ने कुछ लोगों द्वारा मचाए जा रहे शोर-शराबे पर आपत्ति जताई। आरोपी, जो कथित तौर पर ढाबा कर्मचारी और डिलीवरी एजेंट थे, इस बात से भड़क गए और विवाद इतना बढ़ा कि उन्होंने सिंह का पीछा किया और उनके अपार्टमेंट के बाहर उन्हें बुरी तरह पीटा।
शोर मचाने पर शुरू हुआ विवाद, फिर खूनी संघर्ष में बदला
घटना की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हमले के बाद विक्रम सिंह के 20 वर्षीय बेटे, याइफाबा ने उन्हें लहूलुहान हालत में पाया और तुरंत होली फैमिली अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, चोटों के कारण हुए हैमरेजिक शॉक की वजह से उनकी जान चली गई। पुलिस ने यह चार्जशीट न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनम रईस खान के समक्ष पेश की है।
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इनमें धारा 61 (आपराधिक साजिश) और धारा 103(1) व 103(2) शामिल हैं। विशेष रूप से धारा 103(2) उन मामलों से जुड़ी है जहां पांच या अधिक लोगों द्वारा समूह में हत्या की जाती है और यदि अपराध जाति, नस्ल या जन्म स्थान से प्रेरित हो, तो इसमें उम्रकैद या फांसी तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा, उन पर अपराध करने के इरादे से घर में घुसने (धारा 332(a)) का भी आरोप है।
इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी थी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस घटना की कड़ी निंदा की थी और रिजिजू ने खुद जांच की निगरानी की थी। वहीं, नॉर्थ ईस्टर्न स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (NESO) जैसे नागरिक संगठनों ने मांग की थी कि इस हमले के पीछे नस्लीय नफरत के एंगल की गहराई से जांच की जाए। फिलहाल, इस केस को सेशन कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया है, जहां एडिशनल सेशन जज गढ़वाल अब आरोपों पर सुनवाई करेंगे।