दिल्ली पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों से लोन दिलाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया, मुख्य आरोपी गिरफ्तार

Kittu Kumari3 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों से लोन दिलाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया, मुख्य आरोपी गिरफ्तार

राजधानी दिल्ली में फर्जी दस्तावेजों के जरिए बिजनेस लोन दिलाने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। दिल्ली पुलिस के साइबर नॉर्थ पुलिस स्टेशन ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक महिला उद्यमी को पता चला कि उसकी जानकारी के बिना उसकी कंपनी के नाम पर लाखों का लोन ले लिया गया है।

पुलिस के मुताबिक, बुराड़ी की रहने वाली एन सिंह, जो 'मेडिनेक्स हर्बो केयर' की प्रोपराइटर हैं, ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके पैन कार्ड, जीएसटी विवरण और हस्ताक्षरों का गलत इस्तेमाल किया गया है। उन्हें जुलाई 2025 में पता चला कि दिसंबर 2023 में उनकी कंपनी के नाम पर 7.30 लाख रुपये का बिजनेस लोन लिया गया था। हैरानी की बात यह है कि इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब वह अपनी बेटी के लिए एजुकेशन लोन लेने गईं और पाया कि इस फर्जी लोन की वजह से उनका सिबिल (CIBIL) स्कोर खराब हो गया है।

डिजिटल सबूतों और सर्विलांस से खुला राज

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मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एक विशेष टीम बनाई। जांच टीम ने करीब 100 संदिग्ध मोबाइल नंबरों, आईपी लॉग्स और बैंक ट्रांजेक्शन का बारीकी से विश्लेषण किया। जांच के दौरान पता चला कि लोन की रकम कोताक महिंद्रा बैंक के एक खाते में जमा की गई थी, जिसमें से 1 लाख रुपये साहिल नाम के व्यक्ति के खातों में ट्रांसफर किए गए थे।

पुलिस ने हरियाणा के सोनीपत स्थित नहरा गांव में छापेमारी कर 36 वर्षीय साहिल को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि साहिल ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोन आवेदन जमा किया था और वह सिम कार्ड अपने पास रखता था ताकि खाताधारक को पता न चले। आरोपी लोन की मंजूर राशि में से करीब 30 प्रतिशत कमीशन के तौर पर लेता था।

पुलिस ने इस मामले में द्वारका के कैलाश पुरी से नीतू सिंह नाम की एक अन्य आरोपी को भी पकड़ा है। आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन और तीन सिम कार्ड बरामद हुए हैं, जिनमें व्हाट्सएप चैट के जरिए वित्तीय लेनदेन के सबूत मिले हैं।

पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि यह गिरोह टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए लोगों को लोन दिलाने का लालच देता था। वे आवेदकों से आधार, पैन और फोटो जैसे निजी दस्तावेज लेते थे और फिर एडिटिंग टूल्स की मदद से फर्जी जीएसटी और उद्यम रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट तैयार कर लोन हड़प लेते थे। शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपी ने इस तरह के 50 से 60 लोन दिलाने का काम किया है, जिसकी अब गहनता से जांच की जा रही है।

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