दिल्ली पुलिस ने इंदौर में साइबर कॉल सेंटर का किया भंडाफोड़, 6 गिरफ्तार और सुप्रीम कोर्ट ने दिए कड़े निर्देश

दिल्ली पुलिस की द्वारका जिला साइबर सेल ने 5 अगस्त 2026 को इंदौर, मध्य प्रदेश में एक अवैध साइबर कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करने की घोषणा की है, जो बड़े पैमाने पर ऑनलाइन धोखाधड़ी में शामिल था। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है। aninews.in के अनुसार, इस रेड के दौरान पुलिस ने 28 कंप्यूटर, विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं। शुरुआती जांच से पता चलता है कि यह रैकेट बड़े पैमाने पर साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा था और सीधे तौर पर भोले-भाले पीड़ितों को निशाना बना रहा था। इस सिंडिकेट से जुड़े वित्तीय ट्रेल को ट्रैक करने और अन्य साथियों की पहचान करने के लिए आगे की जांच जारी है।
डिजिटल फ्रॉड के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश
यह कार्रवाई डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने के लिए चल रहे राष्ट्रीय प्रयासों के बीच सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में डिजिटल अरेस्ट स्कैम के खिलाफ उपायों को मजबूत करने के उद्देश्य से देशव्यापी निर्देश जारी किए हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की एक स्टेटस रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को चार सप्ताह के भीतर म्युल अकाउंट्स पर एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने देश भर में साइबर फ्रॉड रिड्रेसल मैकेनिज्म को तेजी से लागू करने की भी मांग की है।
ग्रीवांस रिड्रेसल और मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल को लागू करने के आदेश
साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई को और तेज करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ कानून प्रवर्तन एजेंसियों को ग्रीवांस रिड्रेसल मॉड्यूल और मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल को चालू करने का निर्देश दिया है। ये मॉड्यूल गृह मंत्रालय के 2 जनवरी के एसओपी के तहत पेश किए गए थे, जो नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और साइबर आरएमएस को नियंत्रित करते हैं। राज्यों को डिजिटल अरेस्ट स्कैम और उपलब्ध रिपोर्टिंग तथा रिड्रेसल मैकेनिज्म के बारे में पब्लिक अवेयरनेस कैंपेन चलाने का भी निर्देश दिया गया। एसओपी को प्रत्येक हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी उपलब्ध कराया जाना है, जिसमें रजिस्ट्रार जनरलों को बैंक खाता फ्रीजिंग मामलों से निपटने वाली अदालतों और न्यायनिर्णायक प्राधिकरणों को इन ग्रीवांस मैकेनिज्म के बारे में सूचित करने का निर्देश है, जिससे प्रभावित लोग पहले इन उपायों का उपयोग कर सकें।