दिल्ली पुलिस ने किया फर्जी लॉजिस्टिक्स फ्रॉड का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार और 10 शिकायतें जुड़ीं

दिल्ली पुलिस के दक्षिण जिला साइबर पुलिस स्टेशन ने एक फर्जी लॉजिस्टिक्स सर्विस धोखाधड़ी का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है जो खुद को लॉजिस्टिक्स कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर ट्रक-बुकिंग सेवा का झांसा देते थे और ग्राहकों से ठगी करते थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान गाजियाबाद के डिलीवरी बॉय अमन और कपसहेड़ा के डिलीवरी बॉय नरिंदर कुमार के रूप में हुई है।
कैसे हुआ मामले का खुलासा और गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार, दक्षिण साइबर पुलिस स्टेशन में 5 सितंबर को एक ई-एफआईआर दर्ज की गई थी। एक शिकायतकर्ता को ट्रक बुक कराने के नाम पर एडवांस पेमेंट करने के लिए फंसाया गया था, लेकिन वादा करने के बाद भी गाड़ी उपलब्ध नहीं कराई गई। मामले की जांच के बाद पुलिस टीमों ने तकनीकी निगरानी और वित्तीय ट्रेल का विश्लेषण किया, जिसके आधार पर 24 सितंबर को अमन को गिरफ्तार किया गया। अमन के पास से चार मोबाइल फोन बरामद किए गए। पूछताछ के दौरान अमन ने दूसरे व्यक्ति की संलिप्तता का खुलासा किया, जिसके बाद पुलिस ने सह-आरोपी नरिंदर कुमार को कपसहेड़ा से गिरफ्तार कर लिया और उसके पास से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ।
ठगी का तरीका और कुल साइबर शिकायतें
जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी ऑनलाइन बिजनेस डायरेक्टरियों और प्लेटफॉर्म लिस्टिंग का उपयोग करके उन लोगों और व्यवसायों की पहचान करते थे जिन्हें परिवहन सेवाओं की आवश्यकता होती थी। वे खुद को स्थापित लॉजिस्टिक्स कंपनियों का प्रतिनिधि बताते थे और संभावित ग्राहकों से संपर्क करके ट्रक-बुकिंग व परिवहन सेवाओं की पेशकश करते थे। गाड़ियों को सुरक्षित करने के लिए पीड़ितों से एडवांस पेमेंट करने को कहा जाता था और पैसे मिलने के बाद आरोपी न तो वादा किए गए ट्रक उपलब्ध कराते थे और न ही पैसे वापस करते थे। डिजिटल और वित्तीय ट्रेल के आगे के विश्लेषण से जांचकर्ताओं को नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज नौ अतिरिक्त शिकायतों की पहचान करने में मदद मिली, जिनमें कुल 1,53,010 रुपये का कथित नुकसान शामिल है। मूल मामले को मिलाकर, अब तक कुल 10 साइबर-धोखाधड़ी की शिकायतें आरोपियों से जुड़ी पाई गई हैं, जिनमें कुल 2,56,560 रुपये की राशि शामिल है। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।