नकली 20 रुपये के सिक्कों का बड़ा खेल, दिल्ली पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह को दबोचा
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने नकली 20 रुपये के सिक्के बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया और 4 लोगों को गिरफ्तार किया।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए नकली 20 रुपये के सिक्के बनाने और उन्हें बाजार में खपाने वाले नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में नकली 20 रुपये के सिक्के बनाने वाले गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से भारी मात्रा में जाली सिक्के बरामद हुए हैं, जिन्हें बहुत ही शातिर तरीके से छिपाकर ले जाया जा रहा था।
पुलिस की कार्रवाई मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया मेट्रो स्टेशन के पास हुई, जहां एक संदिग्ध वाहन की तलाशी ली गई। गाड़ी के अंदर रखे लैपटॉप बैग और बड़े बोरों में 50 पॉलिथीन के पाउच मिले, जिनमें 100-100 सिक्के रखे थे। कुल मिलाकर पुलिस ने 5,000 नकली सिक्के बरामद किए हैं, जिनकी कुल फेस वैल्यू करीब 1 लाख रुपये है।
सस्ते दाम पर बेचे जा रहे थे जाली सिक्के
इस रैकेट का मास्टरमाइंड उपकार लूथरा है, जो पंजाब के जीरकपुर का रहने वाला है और अभय प्रताप सिंह के नाम से भी काम करता था। उसके साथ पारस जैन, अनुराग पाल (उर्फ लंकेश) और जनार्दन कुमार चौरसिया (उर्फ संतोष) को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इन आरोपियों को सहारनपुर जेल से प्रोडक्शन वारंट के जरिए दिल्ली लाकर पूछताछ की।
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह गिरोह नकली सिक्कों को डिस्काउंट रेट पर सप्लाई करता था। यानी 1 लाख रुपये की फेस वैल्यू वाले नकली सिक्कों को महज 70,000 रुपये में बेचा जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, यह गैंग पहले हरियाणा के सोनीपत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट चला रहा था, लेकिन पकड़े जाने के डर से वे अपना कामकाज सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) शिफ्ट कर रहे थे।
डीसीपी (क्राइम) हर्ष इंदोरा ने बताया कि क्राइम ब्रांच थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है और ये सिक्के किन-किन शहरों में सप्लाई किए गए थे।