DU छात्रा की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 30 करोड़ का साइबर फ्रॉड नेटवर्क ध्वस्त
DU छात्रा की एक छोटी सी शिकायत ने खोला 30 करोड़ के साइबर घोटाले का राज, ग्रेटर नोएडा और कानपुर से 7 गिरफ्तार।

कभी-कभी एक छोटी सी शिकायत बड़े अपराध के राज खोल देती है। दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक छात्रा के साथ हुई महज 6,500 रुपये की ठगी ने दिल्ली पुलिस को एक ऐसे जाल तक पहुँचाया, जिसने करीब 30 करोड़ रुपये का गबन किया था। दिल्ली पुलिस की नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट टीम ने इस मामले में बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए ग्रेटर नोएडा और कानपुर से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पूरा मामला 4 सितंबर 2026 को शुरू हुआ, जब रामजस कॉलेज की सेकंड ईयर की छात्रा फातिमा ने शिकायत दर्ज कराई। फातिमा ने इंस्टाग्राम पर 'Kavya_kurti_hub' नाम के एक अकाउंट से कपड़े खरीदने की कोशिश की थी, जिसमें उसके 6,450 रुपये ठग लिए गए। इस छोटी सी रकम की जांच जब ACP विशेष धत्तरवाल और एडिशनल DCP राम दुलेश मीणा की टीम ने शुरू की, तो मामला उम्मीद से कहीं ज्यादा बड़ा निकला।
फर्जी कंपनियों के जरिए चलता था 'म्यूल अकाउंट्स' का खेल
DCP (नॉर्थ) निहारिका भट्ट ने बताया कि यह गिरोह बहुत शातिर तरीके से काम कर रहा था। आरोपियों ने 'किज़ेंटेक सॉल्यूशंस', 'एग्जीक्यूटिव एज' और 'नेक्सकोर' जैसी फर्जी कंपनियां बनाई थीं। इन कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोले गए, जिन्हें 'म्यूल अकाउंट्स' कहा जाता है। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगों को पैसे ट्रांसफर करने और कमीशन लेने के लिए किया जाता था। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन अमेरिका आधारित व्हाट्सएप नंबरों के जरिए हो रहा था, जिनमें 'मैक्सवेल' और 'सोलिटेयर' नाम के लोग शामिल थे।
पुलिस ने 16 अक्टूबर 2026 को ग्रेटर नोएडा में छापेमारी कर गौरव पांडे, आदित्य मिश्रा, आयुष वर्मा, अभिषेक पाल, हिमांशु राणा और राहुल कुमार को दबोचा। इसके बाद 21 अक्टूबर को कानपुर से सातवें आरोपी उदित प्रताप सिंह भदौरिया को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस की इस कार्रवाई में भारी मात्रा में डिजिटल सबूत और उपकरण बरामद हुए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- 20 मोबाइल फोन और 45 सिम कार्ड
- 39 पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) मशीनें और 15 स्कैनर
- 33 डेबिट कार्ड और 28 चेक बुक
- दो लैपटॉप और कई बैंकिंग दस्तावेज
जांच में पता चला है कि यह नेटवर्क केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि अलग-अलग राज्यों में दर्ज 27 साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़ा है। पुलिस अब केनरा बैंक और पाइन लैब्स मर्चेंट के डेटा की मदद से इन अवैध लेन-देन की गहराई से जांच कर रही है ताकि इस गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुँचा जा सके।