दिल्ली पुलिस ने प्रीतमपुरा में पकड़ा अवैध इंटरनेशनल कॉल सेंटर, 11 लोग गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने दिल्ली के प्रीतमपुरा इलाके में चल रहे एक अवैध इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। यह छापेमारी 21 सितंबर 2026 को हाउस नंबर 249, शिवाजी मार्केट, प्रीतमपुरा विलेज में की गई, जिसमें दो महिलाओं समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के स्पेशल सेल पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत औपचारिक मामला दर्ज किया गया। जांच में सामने आया कि यह गिरोह इमारत की तीसरी और चौथी मंजिल से अमेरिकी नागरिकों को टेक-सपोर्ट धोखाधड़ी का शिकार बना रहा था। इस कार्रवाई को इंस्पेक्टर डाटा राम के नेतृत्व में एसीपी प्रेम चंद्र खंडूरी की देखरेख और डीसीपी IFSO गौरव त्यागी के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक इस धोखाधड़ी नेटवर्क ने पीड़ितों से लगभग 100 करोड़ रुपये ठगे हैं।
गिरोह के काम करने का तरीका यह था कि एजेंट खुद को तकनीकी सहायता कर्मी बताकर पीड़ितों को विश्वास दिलाते थे कि उनके कंप्यूटर में मैलवेयर आ गया है। इसके बाद धोखाधड़ी करने वाले लोग पीड़ितों के सिस्टम में रिमोट के जरिए मैलवेयर इंस्टॉल कर देते थे जिससे फर्जी पॉप-अप और एक टोल-फ्री नंबर दिखाई देता था। जब पीड़ित उस नंबर पर कॉल करते थे, तो वे कॉल्स प्रीतमपुरा सेंटर पर पहुंच जाती थीं। इसके बाद एजेंट अल्ट्राव्यूअर सॉफ्टवेयर के जरिए रिमोट एक्सेस हासिल कर लेते थे और पीड़ितों को यह विश्वास दिलाते थे कि उनके बैंक खाते खतरे में हैं। पैसे ऐंठने के लिए आरोपी वॉयस एप्लीकेशन के जरिए अमेरिका के नंबरों का इस्तेमाल करते थे और गिफ्ट कार्ड या क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भुगतान की मांग करते थे। इसके अलावा, पीड़ितों को डराने और खुद को सही साबित करने के लिए आरोपी एफबीआई और अन्य अमेरिकी संघीय एजेंसियों के नाम से फर्जी संदेश भेजते थे।
तलाशी के दौरान पुलिस ने 41 लाख रुपये नकद, 29 लैपटॉप, 25 मोबाइल फोन, आठ राउटर और एक वाहन बरामद किया है। कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने भारत और विदेश दोनों जगहों पर सक्रिय इस गिरोह के अन्य मुख्य सदस्यों की पहचान कर ली है और इन संदिग्धों को पकड़ने के लिए जांच जारी है।