दिल्ली पुलिस ने झारखंड से लखनऊ तक फैले हेरोइन सिंडिकेट को किया ध्वस्त
दिल्ली पुलिस ने झारखंड से लखनऊ और दिल्ली तक फैले हेरोइन तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ कर 7 लोगों को गिरफ्तार किया है।

दिल्ली की रोहिणी जिला पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए झारखंड से लेकर लखनऊ और दिल्ली-NCR तक फैले हेरोइन तस्करी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत की गई इस बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने करीब 60 करोड़ रुपये की अंतरराष्ट्रीय कीमत वाली 8.128 किलोग्राम हेरोइन जब्त की है। डीसीपी शशांक जायसवाल के निर्देशन में रोहिणी जिला स्पेशल स्टाफ ने 16 सितंबर से 18 अक्टूबर के बीच कई छापेमारी कर इस गिरोह के सात सदस्यों को दबोचा है।
पुलिस की इस कार्रवाई में केवल नशीले पदार्थ ही नहीं, बल्कि 12.81 लाख रुपये नकद, 3.291 किलोग्राम केमिकल प्रीकर्सर और ड्रग्स बनाने के उपकरण भी बरामद हुए हैं। इसके अलावा तस्करी में इस्तेमाल होने वाली तीन एसयूवी (SUV) और एक मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है। जांच में पता चला है कि यह पूरा नेटवर्क बेहद जटिल था, जिसकी जड़ें झारखंड के नक्सल प्रभावित चतरा जिले से जुड़ी थीं।
झारखंड में खेती और लखनऊ में फैक्ट्री: ऐसे चलता था खेल
तफ्तीश में खुलासा हुआ कि झारखंड का रहने वाला 31 वर्षीय प्रकाश कुमार अवैध रूप से अफीम की खेती करता था और कच्चे माल की सप्लाई करता था। यहाँ से अफीम लखनऊ के जानकी विहार स्थित सीता कॉलोनी में स्थित एक गुप्त फैक्ट्री में भेजी जाती थी। इस फैक्ट्री का संचालन गिरोह का मास्टरमाइंड रुखसार अली उर्फ राजू कर रहा था, जिसके खिलाफ पहले से ही एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तीन मामले दर्ज हैं। यहाँ कच्चे माल को हेरोइन में बदला जाता था और फिर उसे दिल्ली-NCR, हरियाणा के सोनीपत, रोहतक और उत्तर प्रदेश के बदायूं व बरेली जैसे इलाकों में सप्लाई किया जाता था।
पुलिस ने इस सिंडिकेट की कड़ियां एक-एक कर जोड़ीं। इसकी शुरुआत 16 सितंबर को बेगमपुर से हुई, जहाँ रोहतक के लक्ष्मण हुड्डा को 300 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा गया। इसके बाद 17 सितंबर को सोनीपत के अनिल उर्फ भोला को पकड़ा गया, जो एक घोषित अपराधी है और उस पर 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं। आगे की जांच में बरेली के एजाज अहमद, बदायूं के मोहम्मद अजहर और अंत में 18 अक्टूबर को झारखंड के प्रकाश कुमार को गिरफ्तार कर इस पूरे काले कारोबार का अंत किया गया।