बिजनेस लोन के नाम पर फर्जीवाड़ा: दिल्ली पुलिस ने मुख्य आरोपी साहिल को दबोचा

दिल्ली पुलिस की साइबर नॉर्थ यूनिट ने एक बड़े लोन फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो फर्जी दस्तावेजों के जरिए बिजनेस लोन हड़पने का काम कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरोह के मुख्य आरोपी साहिल को गिरफ्तार कर लिया है। यह पूरा खेल बेहद शातिर तरीके से रचा गया था, जिसमें लोगों की निजी जानकारियों का इस्तेमाल कर बैंकों से पैसे ऐंठे जा रहे थे।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब बुराड़ी की रहने वाली एन सिंह, जो 'मेडिनेक्स हर्बो केयर' की मालकिन हैं, अपनी बेटी के लिए एजुकेशन लोन लेने गईं। वहां उन्हें पता चला कि उनका सिबिल (CIBIL) स्कोर काफी खराब हो चुका है। जब उन्होंने गहराई से जांच की, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्हें पता चला कि दिसंबर 2023 में किसी ने उनके पैन कार्ड, जीएसटी डिटेल्स, सिग्नेचर और कंपनी के अन्य दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर 'लेंडिंगकार्ट फाइनेंस लिमिटेड' से 7.30 लाख रुपये का बिजनेस लोन ले लिया था। इतना ही नहीं, उनकी जानकारी के बिना उनके नाम पर एक बैंक खाता भी खोल लिया गया था।
तकनीकी जांच से खुला जाल
पीड़िता को इस धोखाधड़ी की आधिकारिक जानकारी जुलाई 2025 में मिली, जिसके बाद मामला पुलिस के पास पहुंचा। पुलिस ने जब पैसों के लेन-देन की कड़ियां जोड़ीं, तो पता चला कि लोन की रकम को पहले कोटक महिंद्रा बैंक के एक खाते में डाला गया, जहाँ से करीब 1 लाख रुपये आरोपी साहिल से जुड़े खातों में ट्रांसफर किए गए।
पुलिस ने इस गिरोह तक पहुँचने के लिए काफी मेहनत की। जांच टीम ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), IMEI डिटेल्स, आईपी लॉग्स और बैंक ट्रांजैक्शन का बारीकी से विश्लेषण किया। करीब 100 संदिग्ध मोबाइल नंबरों की निगरानी की गई, जिससे पुलिस को हरियाणा के सोनीपत और दिल्ली के द्वारका में संदिग्धों के होने का सुराग मिला।
पुलिस के मुताबिक, यह सिर्फ एक मामला नहीं है। जिन बैंक खातों का इस्तेमाल इस लोन फ्रॉड में हुआ, उन्हीं खातों से जुड़े अलग-अलग राज्यों के छह अन्य साइबर फ्रॉड मामले भी सामने आए हैं। फिलहाल पुलिस इस रैकेट के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है ताकि इस पूरे नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जा सके।