DU छात्रा की 6,500 की शिकायत, दिल्ली पुलिस ने किया 30 करोड़ के साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़
दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा की शिकायत पर पुलिस ने 30 करोड़ के साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया। ग्रेटर नोएडा और कानपुर से 7 गिरफ्तार।

दिल्ली पुलिस ने एक ऐसी बड़ी कामयाबी हासिल की है, जहां एक कॉलेज छात्रा के साथ हुई मामूली ठगी की जांच ने 30 करोड़ रुपये के एक अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया। यह पूरा मामला तब सामने आया जब दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज की सेकंड ईयर की छात्रा फातिमा ने शिकायत दर्ज कराई कि 'काव्या कुर्ती' नाम की एक इंस्टाग्राम फर्म ने उनसे खरीदारी के नाम पर पैसे ठगे हैं।
डीसीपी (नॉर्थ) निहारिका भट्ट के मुताबिक, पीड़िता ने अलग-अलग बहानों के तहत 1,150, 2,000, 2,650 और 650 रुपये की किस्तों में भुगतान किया था, लेकिन न तो उसे सामान मिला और न ही पैसे वापस। सितंबर में दर्ज हुई इस एफआईआर के बाद पुलिस ने जब तकनीकी जांच शुरू की, तो मामला उम्मीद से कहीं ज्यादा बड़ा निकला।
तकनीकी जाल और फर्जी कंपनियों का खेल
पुलिस ने करीब 200 मोबाइल नंबरों, IMEI नंबरों और फ्लिपकार्ट, जोमैटो व ब्लू डार्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स के बैंकिंग ट्रांजेक्शन का विश्लेषण किया। जांच के दौरान पता चला कि ठगी की रकम पाइन लैब्स मर्चेंट के जरिए किज़ेंटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के केनरा बैंक खाते में जा रही थी।
इस कड़ी को जोड़ते हुए पुलिस ने छापेमारी की और कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें से आदित्य मिश्रा, आयुष वर्मा, अभिषेक पाल, हिमांशु राणा, राहुल कुमार और गौरव पांडे को 16 अक्टूबर को ग्रेटर नोएडा से दबोचा गया, जबकि सातवें आरोपी उदित प्रताप सिंह भदौरिया को 21 अक्टूबर को कानपुर से गिरफ्तार किया गया।
जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह ग्रेटर नोएडा में किराए की जगहों पर किज़ेंटेक सॉल्यूशंस, एग्जीक्यूटिव एज और नेक्सकोर नाम की तीन शेल कंपनियां चला रहा था। इन कंपनियों का इस्तेमाल केवल अवैध पैसों को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करीब 25 बैंक खाते खोले थे, जिनके जरिए अब तक 30 करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी की गई है।
एसीपी विशेष धत्तेरवाल और एडिशनल डीसीपी राम दुलेश मीणा के नेतृत्व में चली इस कार्रवाई में पुलिस ने बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। यह नेटवर्क देश के विभिन्न राज्यों से आई कम से कम 27 अलग-अलग साइबर फ्रॉड शिकायतों से जुड़ा पाया गया है।