जंतर मंतर पर CJP के विरोध प्रदर्शन के बीच दिल्ली पुलिस का हाई-टेक अवतार, तैनात किए बॉडी कैमरे

Kittu Kumari11 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
जंतर मंतर पर CJP के विरोध प्रदर्शन के बीच दिल्ली पुलिस का हाई-टेक अवतार, तैनात किए बॉडी कैमरे

राजधानी के जंतर मंतर पर जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपना विरोध प्रदर्शन आयोजित किया, तो वहां सुरक्षा का नजारा कुछ अलग ही था। 10 अक्टूबर 2026 को हुए इस प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के जवानों को हाई-टेक बॉडी कैमरों से लैस देखा गया। पुलिस का यह कदम न केवल सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए था, बल्कि प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच होने वाली बातचीत की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भी उठाया गया है।

सुरक्षा के इंतजाम इतने कड़े थे कि वहां मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग की गई थी और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के साथ-साथ लगभग 35,000 से ज्यादा पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ये बॉडी कैमरे एक 'स्वतंत्र गवाह' की तरह काम करते हैं, जो मौके पर होने वाली हर गतिविधि की रियल-टाइम रिकॉर्डिंग करते हैं।

तकनीक और कानून का तालमेल

इन कैमरों की खासियत यह है कि ये कम रोशनी में भी साफ वीडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं। एक बार चार्ज होने पर ये डिवाइस 12 से 15 घंटे तक लगातार रिकॉर्डिंग करने में सक्षम हैं और इनमें 32 GB का स्टोरेज दिया गया है। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य कानूनी कार्यवाही, आंतरिक समीक्षा और किसी भी तरह के कदाचार की जांच में मदद करना है। साथ ही, यह पुलिसकर्मियों को झूठे आरोपों से बचाने में भी मददगार साबित होगा।

यह कदम भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के अनुरूप है, जिसमें तलाशी, जब्ती और गवाहों के बयान जैसे पुलिसिया कार्यों के दौरान ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को अनिवार्य बनाया गया है। गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने भी बॉडी कैमरों के अनिवार्य उपयोग को लेकर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की थी। कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2026 को सरकार को निर्देश दिया था कि वह इस याचिका पर विचार करे और अगले छह महीनों के भीतर फुटेज के उपयोग और संरक्षण के लिए एक औपचारिक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करे।

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