गुरुद्वारा बंगला साहिब में जूते पहनकर घुसे पुलिसकर्मी? दिल्ली पुलिस ने आरोपों को बताया साजिश

राजधानी दिल्ली का प्रसिद्ध गुरुद्वारा बंगला साहिब एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह कोई धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि एक विवादित वीडियो है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस के जवानों ने गुरुद्वारे के भीतर जूते पहनकर प्रवेश किया। इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, हालांकि दिल्ली पुलिस ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, यह वीडियो गलत इरादे से फैलाया गया है ताकि लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई जा सके और शहर में सांप्रदायिक तनाव पैदा किया जाए। पुलिस ने स्पष्ट किया कि वीडियो में दिख रहे जवान उस सामान्य रास्ते (कॉमन पैसेज) पर थे, जिसका इस्तेमाल सभी श्रद्धालु करते हैं। यह वह क्षेत्र है जहां से गुजरकर लोग जूते उतारने वाले स्थान तक पहुंचते हैं और फिर पवित्र परिसर में प्रवेश करते हैं। पुलिस का कहना है कि किसी भी जवान ने पवित्र क्षेत्र में जूते पहनकर कदम नहीं रखा।
विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक घमासान
यह पूरा विवाद शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को तब शुरू हुआ जब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया था। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने शहर भर में करीब 4,000 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें यशस्विनी राजे सिंह भी शामिल थीं, जिन्हें गुरुद्वारे के पास से पकड़ा गया था।
इस कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सौरभ भारद्वाज, जरनैल सिंह और पंजाब के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पुलिस की इस हरकत की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी बिना सिर ढके, जूते पहनकर और हाथों में लाठियां लेकर परिसर में घुसे, जो गुरुद्वारे की मर्यादा का उल्लंघन है। AAP नेताओं ने इस घटना की तुलना 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार से तक कर दी।
दूसरी ओर, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (DSGMC) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने एक अलग पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि पुलिस केवल उन प्रदर्शनकारियों को पकड़ने के लिए अंदर आई थी, जिन्होंने गुरुद्वारा स्टाफ की इच्छा के विरुद्ध वहां शरण ली थी। कालका ने AAP नेतृत्व पर गुरुद्वारे के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि संस्थान सबकी मदद करता है, लेकिन इसे राजनीतिक प्रदर्शन का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा।
वहीं, गुरुद्वारा बंगला साहिब के मैनेजर राजेंद्र सिंह ने पुलिस और श्रद्धालुओं के बीच किसी भी तरह की शारीरिक झड़प की खबरों को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे इंटरनेट पर फैल रही अपुष्ट अफवाहों पर ध्यान न दें।
न्यू दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने पुष्टि की है कि इस भ्रामक वीडियो को फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जा रही है, क्योंकि यह धार्मिक शांति को भंग करने की एक सोची-समझी कोशिश है।