दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी: 26 साल से फरार मर्डर आरोपी आखिरकार गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने 1998 के एक सनसनीखेज मर्डर केस के आरोपी विश्वानाथ सिंह को 26 साल बाद गिरफ्तार किया है। पढ़ें पूरी कहानी।

दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे मामले में बड़ी सफलता हासिल की है, जहां एक अपराधी पिछले 26 सालों से कानून की नजरों से बच रहा था। क्राइम ब्रांच की टीम ने 62 वर्षीय विश्वानाथ सिंह उर्फ मुन्ना को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के शिव विहार इलाके से गिरफ्तार किया है। विश्वानाथ पर 1998 में हुए एक सोचे-समझे मर्डर केस में वांछित था, जिसे पकड़ने के लिए पुलिस ढाई दशक से कोशिशें कर रही थी।
यह पूरा मामला 20 अक्टूबर 1998 का है, जब गोकलपुरी इलाके में 24 साल के जय प्रकाश गंभीर हालत में बेहोश पाए गए थे। शुरुआत में पुलिस को लगा कि यह एक सड़क हादसा है, लेकिन जब गहराई से जांच हुई तो खुलासा हुआ कि यह कोई एक्सीडेंट नहीं बल्कि एक खौफनाक मर्डर था। जांच में सामने आया कि पीड़ित का पड़ोसी विश्वानाथ सिंह ही इस हत्या का जिम्मेदार था।
शक और हैमर से किया था कत्ल
पुलिस जांच के मुताबिक, विश्वानाथ को शक था कि जय प्रकाश का उसकी पत्नी के साथ अवैध संबंध है। इसी रंजिश और शक के चलते उसने जय प्रकाश के सिर पर हथौड़े से जोरदार वार किया और उसकी जान ले ली। पकड़े जाने के डर से उसने इस वारदात को एक 'हिट एंड रन' हादसे की तरह पेश करने की कोशिश की, ताकि किसी को शक न हो।
इस खुलासे के बाद साल 2000 में खजूरी खास थाने में मर्डर का नया केस दर्ज किया गया। जब आरोपी पुलिस के हाथ नहीं लगा, तो 5 दिसंबर 2001 को उसे आधिकारिक तौर पर 'घोषित अपराधी' (Proclaimed Offender) करार दे दिया गया।
गिरफ्तारी से बचने के लिए विश्वानाथ ने पिछले ढाई दशकों में कई बार अपनी जगह बदली। वह दिल्ली, फरीदाबाद, लोनी और इटावा जैसे शहरों में थोक मावा व्यापार के बहाने अपनी पहचान छिपाकर रहा। हालांकि, क्राइम ब्रांच ने हार नहीं मानी और उत्तर प्रदेश के इटावा स्थित उसके पैतृक गांव के जरिए सुराग जुटाए। पुलिस ने दिल्ली में उसके परिवार के सदस्यों और भाइयों के संपर्क में रहने वाले लोगों की निगरानी की, जिसके बाद उसकी सटीक लोकेशन मिली और उसे धर दबोचा गया।