दिल्ली पुलिस ने सीलमपुर में प्रतिबंधित चाइनीज मांझा बेचने वाले एक व्यक्ति को किया गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने गुरुवार, 8 अगस्त 2026 को सीलमपुर इलाके से प्रतिबंधित चाइनीज पतंग की डोर, जिसे 'चाइनीज मांझा' भी कहा जाता है, बेचने के आरोप में मोहम्मद जमीर नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने उसके कब्जे से प्रतिबंधित डोर के 30 रोल बरामद किए हैं। भारतीय न्याय संहिता की धारा 223(A) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और अवैध कारोबार में शामिल अन्य लोगों की पहचान के लिए आगे की पूछताछ जारी है। यह गिरफ्तारी दिल्ली और आसपास के इलाकों में इन खतरनाक पतंग की डोर के अवैध सप्लाई नेटवर्क के खिलाफ चल रही बड़ी कार्रवाई के बीच हुई है।
अन्य गिरफ्तारियां और सप्लाई नेटवर्क का खुलासा
ठीक एक दिन पहले, 7 अगस्त 2026 को, दिल्ली पुलिस ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश में सक्रिय प्रतिबंधित चाइनीज पतंग की डोर के एक बड़े सप्लाई नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था। इस ऑपरेशन में चार लोगों की गिरफ्तारी हुई और प्रतिबंधित सामग्री की 372 रीलों को जब्त किया गया। जांच की शुरुआत 6 अगस्त को ज्योति नगर में कामरान (20) की गिरफ्तारी से हुई थी, जिसके पास से 45 रीलें मिली थीं। इसके बाद की गई पूछताछ के बाद लोनी, गाजियाबाद से आकाश और प्रेम कुमार तथा दिल्ली के नंद नगरी से रवि उर्फ गोलू को पकड़ा गया, जिससे अवैध सप्लाई चेन को बड़ा झटका लगा है।
प्रतिबंध के नियम और कानूनी सजा
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में नायलॉन, प्लास्टिक या किसी अन्य सिंथेटिक सामग्री से बनी पतंग उड़ाने वाली डोर की बिक्री, उत्पादन, भंडारण, आपूर्ति, आयात और उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध है, जिसमें "चाइनीज मांझा" और कांच या धातु के घटकों से लेपित कोई भी डोर शामिल है। दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग ने 10 जनवरी 2017 को इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की थी (Source: Delhi Government Notification), जिसे बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा बरकरार रखा गया था (Source: Delhi High Court Order)। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भी 2017 में ऐसी डोर पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाया था। पतंग उड़ाने के लिए केवल सूती धागे की अनुमति है, जो किसी भी तीखे, धात्विक या कांच के घटकों, चिपकने वाले पदार्थों या मजबूत करने वाली सामग्री से मुक्त हो। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत जारी इन निर्देशों के उल्लंघन पर अधिनियम की धारा 15 के तहत पांच साल तक की जेल, एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।