जंतर-मंतर हिंसा में AI का इस्तेमाल! पुलिस जांच में 2800 से ज्यादा क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले लोग मिले

दिल्ली पुलिस ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रोटेस्टर्स ने भीड़ को नियंत्रित करने वाले उपायों से निपटने के लिए Artificial Intelligence (AI) टूल्स का इस्तेमाल किया था। 30 जुलाई 2026 को संसद में पेश किए गए एक दस्तावेज से यह पुष्टि हुई है कि Facial Recognition System (FRS) वैन ने प्रदर्शन स्थल पर 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की है जिनका क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है।
कॉकट्रेच जनता पार्टी के 'चलो संसद' प्रोटेस्ट में हुआ AI का इस्तेमाल
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांचकर्ताओं का मानना है कि कॉकट्रेच जनता पार्टी के 'चलो संसद' प्रोटेस्ट में शामिल कुछ लोगों ने टियर गैस के असर को कम करने के तरीके ढूंढने के लिए AI का सहारा लिया। प्रदर्शनकारियों ने गीले जूट के बोरे, हार्ड हैट, मास्क और गॉगल्स जैसे प्रोटेक्टिव गियर की तैयारी की थी। क्राइम-कुंडली और डोजियर रिकॉर्ड से पहचाने गए ये लोग हत्या के 101 मामलों, रेप के 61 मामलों, डकैती और लूट के 284 मामलों तथा NDPS एक्ट के 67 मामलों सहित कई गंभीर अपराधों से जुड़े थे। पुलिस इस समय इन डिजिटल और अन्य सबूतों को इकट्ठा कर रही है।
केंद्रीय मंत्री ने फायरिंग के दावों को नकारा, जंतर-मंतर पर स्थिति स्पष्ट
इस बीच, 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh ने यह साफ किया कि 20 जुलाई की कार्रवाई के दौरान केवल टियर गैस का इस्तेमाल किया गया था, और उन्होंने गोलीबारी के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। इसके अलावा, दिल्ली पुलिस ने 30 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया की अफवाहों का जवाब देते हुए फिर से यह स्पष्ट किया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जंतर-मंतर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए एक 'एक्टिव और ऑथराइज्ड साइट' बना हुआ है।